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इंडोनेशिया / जंगल बचाने के लिए उलटे कदमों से 800 किमी के सफर पर निकले मेदी



मेदी बेस्तोनी। मेदी बेस्तोनी।
Medi Bastoni hopes to get to meet the president when he arrives in Jakarta, in several weeks
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मेदी बेस्तोनी।मेदी बेस्तोनी।
Medi Bastoni hopes to get to meet the president when he arrives in Jakarta, in several weeks

  • इंडोनेशिया के प्रांत ईस्ट जावा के गांव डोनो से जकार्ता के बीच का सफर तय करेंगे
  • वे अपने साथ 3 लाख रुपए लेकर निकले हैं, रात पुलिस स्टेशन में बिताते हैं
  • मेदी ने देश के जंगलों को बचाने के लिए और लोगों को जागरूक करने के लिए यह कदम उठाया है

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2019, 04:48 PM IST

जकार्ता. पर्यावरण को बचाने के लिए 46 साल के मेदी बेस्तोनी ईस्ट जावा के गांव डोनों से जापान की राजधानी जकार्ता तक 800 किमी के सफर पर निकल पड़े हैं। वह यह दूरी उलटे पांव चलकर पूरी कर रहे हैं। मेदी ने देश के जंगलों को बचाने के लिए और लोगों को जागरूक करने के लिए यह कदम उठाया है। उन्हें 150 से ज्यादा घंटे का वक्त लगेगा। यही दूरी गाड़ी से पूरा करने में कम से कम 10 घंटे लगते हैं। 

 

मेदी का उलटे कदमों वाला यह सफर 18 जुलाई को शुरू हुआ। वह घर से एक बैग और तीन लाख रुपए लेकर निकले। उन्हें उम्मीद है कि देश के स्वतंत्रता दिवस यानी 17 अगस्त को वह नेशनल पैलेस पहुंचकर राष्ट्रपति जोको विदोदो से मुलाकात कर पाएंगे। इस दौरान वह विदोदो को माउंट विलिस पर एक पौधा भी लगाने को देंगे ताकि बाकी लोग भी पौधे लगाने के लिए प्रेरित हों।

1970 के मुकाबले अब आधे रह गए हैं जंगल

  1. मेदी बताते हैं कि 1970 के मुकाबले इंडोनेशिया के जंगल में पेड़ों की संख्या अब आधी रह गई है। हर साल कागज, प्लाईवुड और पाम ऑयल के लिए लाखों हेक्टेयर पेड़ों की कटाई होती है। यह मुद्दा सिर्फ इंडोनेशिया का नहीं, बल्कि वैश्विक है। अगर पर्यावरण को बचाना है तो अभी कदम उठाने जरूरी हैं।

  2. मेदी हर दिन करीब 30 किमी पैदल चलते हैं। इस यात्रा के दौरान वे सिर पर जापानी हैट पहनते हैं, जिसके ऊपर उन्होंने प्लास्टिक की पाइप से बना एक बड़ा हैट जोड़ा है। इसी पर एक रियर व्यू वाला शीशा लगाया है, जिससे उन्हें अपने आस-पास की चीजें आसानी से दिखती हैं। मेदी सफर के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर मस्जिदों, पुलिस स्टेशन और सिक्युरिटी चेकपोस्ट पर रात को ठहरते हैं।
     

  3. वह बताते हैं कि लंच और डिनर सड़क किनारे बने फूड स्टॉल्स पर ही खाता हूं। मेदी का कहना है कि उन्हें यह सफर तय करने में 30 से 40 दिन लगेंगे। मुझे उम्मीद है कि मैं 17 अगस्त तक जकार्ता पहुंच जाऊंगा। इससे पहले मेदी 2016 में भी एक पर्यावरण मुहिम के लिए उलटे कदमों से जावा प्रांत घूम चुके हैं।

     

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