कर्नाटक / 170 साल में पहली बार गैर मुस्लिमों के लिए मोदी मस्जिद खोली गई; 400 लोग पहुंचे

सोशल मीडिया पर इस्लाम को बेहतर समझने के लिए 'विजिट माय मॉस्क' की शुरुआत हुई थी। सोशल मीडिया पर इस्लाम को बेहतर समझने के लिए 'विजिट माय मॉस्क' की शुरुआत हुई थी।
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सोशल मीडिया पर इस्लाम को बेहतर समझने के लिए 'विजिट माय मॉस्क' की शुरुआत हुई थी।सोशल मीडिया पर इस्लाम को बेहतर समझने के लिए 'विजिट माय मॉस्क' की शुरुआत हुई थी।

  • बेंगलुरु के टस्कर टाउन स्थित मोदी मस्जिद दूसरे धर्मावलंबियों के लिए रविवार को खोली गई 
  • इस पहल का मकसद- लोगों को इस्लाम के बारे में बताना और उसकी भ्रांतियां दूर करना

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2020, 07:07 AM IST

बेंगलुरु. कर्नाटक में बेंगलुरु के टस्कर टाउन स्थित मोदी मस्जिद रविवार को 170 साल में पहली बार गैर मुस्लिमों के लिए खोली गई। पहले दिन करीब 400 लोगों ने मस्जिद का दौरा किया। इनमें हर धर्म के पुरुष और महिलाएं शामिल रहीं।

गैर मुस्लिमों के लिए मस्जिद खोलने का उद्देश्य है- दूसरे धर्म के लोगों के मन में इस्लाम को लेकर जानकारी बढ़ाना और भ्रांतियां दूर करना। आयोजकों ने मस्जिद पहुंचे पर्यटकों को इस्लाम के सिद्धांतों के बारे में बताया। साथ ही कुरान की आयतें भी बुलवाई गईं। इस दौरान गैर इस्लाम समुदाय ने इस्लाम को लेकर अपने संदेहों पर सवाल किए। 
 
मुंबई से शुरू हुई थी विजिट माय मॉस्क 
पर्यटकों के लिए एक मेडिटेशन सेशन भी रखा गया, जो इवेंट का एक हिस्सा था। आगंतुकों को कुरान की कॉपी भी दी गई। दरअसल, मुंबई के एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सोशल मीडिया पर गैर-मुस्लिम समुदायों को इस्लाम को बेहतर समझने के लिए 'विजिट माय मॉस्क' नाम से खुला निमंत्रण भेजा था। इस ग्रुप ने क्रिश्चयन कॉलेज के छात्रों के लिए ऐसा ही एक इवेंट आयोजित किया था।

इसलिए नाम पड़ा मोदी मस्जिद
चैरिटेबल ट्रस्ट के सादिक सैलानी ने बताया कि मस्जिद के दरवाजे हर भारतीय के लिए रविवार को खोले गए। इस मस्जिद का पूरा नाम मोदी अब्दुल गफूर मस्जिद है। इन्होंने ही मस्जिद के लिए जमीन दान में दी थी। इसलिए इसका नाम उनके नाम पर रखा गया।

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