तकनीक / नासा मंगल और चंद्रमा पर फफूंद से घर बनाना चाहता है, ताकि अंतरिक्ष यात्री वहां रह सकें

NASA wants to build houses with mold on Mars and the Moon, so astronauts can stay there
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NASA wants to build houses with mold on Mars and the Moon, so astronauts can stay there

  • वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों की मिट्टी पर मायसेलिया फफूंद विकसित करने की संभावना तलाश रहे हैं 
  • इसकी कई खासियत हैं- जैसे कांक्रीट से ज्यादा बेंड स्ट्रेंथ होती है, इन्हें उगाने के साथ मरम्मत की जा सकती है
  • शोधकर्ताओं ने मायसेलिया फफूंद से ईंट और स्टूल बनाने में कामयाबी हासिल की

दैनिक भास्कर

Jan 17, 2020, 10:17 PM IST

न्यूयॉर्क. नासा मंगल और चंद्रमा जैसे दूसरे ग्रहों पर 'फ्यूचर होम' बनाने की तकनीक पर काम कर रहा है। इसके वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर टेस्ट कामयाब रहे, तो फफूंद से घर बनाया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों की मिट्टी पर मायसेलिया कवक विकसित करने की संभावना तलाश रहे हैं और कुछ हद कामयाबी भी मिली है। 

दावा है कि फन्जाई (कवक) और जमीन के नीचे पाए जाने वाले थ्रेड्स जो फफूंद (मायसेलिया भी कहते हैं) को बनाते हैं, की मदद से दूसरे ग्रहों पर घर बनाने की तकनीक को विकसित किया जा सकता है। इस अध्ययन को माइको-आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट के तहत अंजाम दिया जा रहा है, जिसे नासा इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट (एनआईएसी) फंडिंग कर रही है। 

इसे सही परिस्थिति में उगाया जा सकता है 

  • नासा का कहना है कि ये छोटे थ्रेड्स (एक कवक का मायसेलिया हिस्सा) अत्यधिक परिशुद्धता के साथ जटिल संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जो मशरूम जैसी बड़ी संरचनाओं के रूप में उभरते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कवक की चार खासियत हैं। पहली- इनकी कांक्रीट से ज्यादा बेंड स्ट्रेंथ होती है। दूसरी- इन्हें उगाया और इनकी मरम्मत की जा सकती है। तीसरी- अच्छे इन्सुलेटर होते हैं। चौथी- अग्निरोधी भी होते हैं। 
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल या चंद्रमा पर पहुंचने के बाद फफूंद को सही परिस्थिति यानी पानी और प्रकाश संश्लेषक बैक्टीरिया में विकसित किया जा सकता है। जब फफूंद एक तय आकार में बढ़ जाएगी, उसे गर्माहट देकर मार दिया जाएगा। वैज्ञानिक ऐसे तरीकों पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें फंगल मायसेलिया की परत अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण से बचाने के साथ बिल्डिंग के अंदर ऑक्सीजन भी प्रदान करे।
  • इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे वैज्ञानिक लिन रॉथ्सचाइल्ड ने बताया कि दूसरे ग्रहों के लिए आवास डिजाइन अभी शुरुआती दौर में हैं। इन ग्रहों पर अपने यहां से बिल्डिंग मटैरियल ले जाने में काफी ऊर्जा लगेगी और लागत भी ज्यादा आएगी। इसलिए अगर यह प्रोजेक्ट कामयाब रहा तो दूसरे ग्रहों पर घर बनाने का सपना साकार हो पाएगा।  
मायसेलिया फफूंद से बनी ईटें।

फफूंद से स्टूल और ईटें बनाई गईं
शोधकर्ताओं ने मायसेलिया फफूंद से ईंट और स्टूल बनाने में कामयाबी हासिल की है। माइको-आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट के तहत स्टेनफोर्ड और ब्राउन यूनिवर्सिटीज की टीम ने 2018 में मायसेलिया फंगस को हफ्ते विकसित कर एक स्टूल तैयार किया था। यह दिखने में ऐसा लगता है कि किसी ने इसे लंबे वक्त रेफ्रिरेजटर में रखकर भूल गया हो। इसके अलावा, मायसेलिया फफूंद में लकड़ी का भूरा मिलाकर ईटें बनाई थीं। 

मायसेलिया फफूंद से बना स्टूल।

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