रिसर्च / 22 साल खुद को कटवाया, तब एंटी मॉस्कीटो ट्यूब नेट बनाई; इस पर सालाना खर्च 150 रुपए



बार्ट क्नोल्स। बार्ट क्नोल्स।
बार्ट क्नोल्स द्वारा बनाई मॉस्कीटो ट्यूब्स नेट। बार्ट क्नोल्स द्वारा बनाई मॉस्कीटो ट्यूब्स नेट।
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बार्ट क्नोल्स।बार्ट क्नोल्स।
बार्ट क्नोल्स द्वारा बनाई मॉस्कीटो ट्यूब्स नेट।बार्ट क्नोल्स द्वारा बनाई मॉस्कीटो ट्यूब्स नेट।

  • नीदरलैंड्स के कीट विज्ञानी बार्ट क्नोल्स मच्छरों से बचाव का उपाय दो दशकों से खोज रहे थे
  • ट्यूब नेट्स बनाने के लिए वे हफ्ते में दो बार लैब में जा कर मच्छरों से खुद को कटवाते थे
  • तंजानिया के 1300 घरों में इसका परीक्षण 100 फीसदी कामयाब रहा 

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 10:24 PM IST

दोदोमा (तंजानिया). नीदरलैंड्स के कीट विज्ञानी बार्ट क्नोल्स पिछले 22 सालों से मच्छरों को खत्म करने के लिए रिसर्च कर रहे हैं। इसके लिए वह हफ्ते में दो बार लैब में जा कर मच्छरों से खुद को कटवाया, ताकि वे इन्हें मारने वाली डिवाइस बना सकें। वे इसमें कायमाब भी हुए हैं।

 

यूरोपीय रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने एक जालीदार प्लास्टिक ट्यूब नेट बनाई है। इसका परीक्षण पिछले दिनों तंजानिया के 1300 से ज्यादा घरों में किया गया है। नतीजे 100 फीसदी सफल रहे। प्लास्टिक ट्यूब लगाना शुरुआत में खर्चीला है, लेकिन बाद में सिर्फ जाली बदलनी होती है। एक साल में इस पर खर्च दो डॉलर यानी 150 रुपए आता है।

ऐसे काम करती है एंटी मॉस्कीटो ट्यूब्स नेट

  1. मच्छर दरवाजों, खिड़कियों और वेटिंलेशन से घरों में आते हैं। इसके लिए हवा वाले रास्तों में एंटी मॉस्कीटो ट्यूब्स नेट लगानी होती है। जैसे ही मच्छर घर में आते हैं, वे नेट में चिपक जाते हैं और इसमें लगे कीटनाशक के प्रभाव से मर जाते हैं। क्नोल्स अब इसे और उन्नत बनाने और प्रयोग के लिए स्थानीय प्रोडक्शन कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं। वे एंटी मॉस्कीटो ट्यूब्स को नई इमारतों में लगाने की योजना बना रहे हैं।

     

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  2. वैज्ञानिक क्नोल्स के मुताबिक, "मच्छर खून चूसने के साथ ही सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ये करोड़ों सालों से इंसानों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। ये लोगों को उनकी गंध से खोजने में माहिर हैं। हम इंसानों ने इन्हें नियंत्रित करने के कई प्रयास किए, लेकिन वे पूरी तरह कामयाब नहीं हुए। यदि हम कीटनाशक छिड़कते हैं, तो मच्छर प्रतिरोधी क्षमता हासिल कर लेते हैं। इसलिए हमें इन मच्छरों को मारने का कोई नया और रचनात्मक तरीका खोजना पड़ा।"

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