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ब्रेस्ट कैंसर, हार्ट ट्यूमर से पीड़ित महिला की एक साथ दो सर्जरी, ऐसा दुनिया में पहली बार

2 वर्ष पहले
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  • दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में बिहार के गोपालगंज की 47 वर्षीय महिला की हुई दुर्लभ सर्जरी 
  • डॉक्टर बोले- एक बार में सिर्फ एक सर्जरी करने से खतरे में होती महिला की जिंदगी
  • 5 घंटे बेहोश कर अलग-अलग डॉक्टरों ने दो बार में सर्जरी कर बचाई महिला की जान

नई दिल्ली. दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ब्रेस्ट कैंसर और हार्ट ट्यूमर से पीड़ित एक महिला की एक साथ दो सर्जरी की गईं। कोई भी सर्जरी न टाली जाए, इस कारण दोनों सर्जरी एक साथ की गईं। डॉक्टरों के मुताबिक, यदि कोई भी सर्जरी टाली जाती, तो महिला की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी। इस दौरान महिला को करीब साढ़े पांच घंटे के लिए बेहोश किया गया। इसके बाद अलग-अलग डॉक्टरों ने दो बार में सर्जरी की। डॉक्टरों का दावा है कि हार्ट में एट्रियल मायक्सोमा नाम के ट्यूमर और ब्रेस्ट कैंसर को निकालने के लिए एक साथ की गई ऐसी सर्जरी दुनिया में पहली बार हुई है।
 
ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित बिहार के गोपालगंज की 47 साल की रेणु श्रीवास्तव इलाज के लिए दिल्ली पहुंची थीं। यहां उनके सीने के सीटी स्कैन से पता चला कि उनके ब्रेस्ट में कैंसर था। जबकि, हार्ट (बाएं एट्रियम) में ट्यूमर दिखाई दे रहा था। यह कार्डियाक ट्यूमर था। एक साथ दो गंभीर बीमारियों के बारे में पता चलने पर डॉक्टरों के लिए सर्जरी चुनौती बन गई थी।
 
हार्ट पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था 
डॉक्टर मनदीप मलहोत्रा ने बताया कि दो गंभीर बीमारियों के बारे में पता चलने पर टीम ने तय किया कि ब्रेस्ट में मौजूद मैलिग्नैंट ट्यूमर का तत्काल इलाज करना जरूरी है। इसके लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड इम्युनोथेरेपी, रेडिएशन तथा हारमोनल थेरेपी की जरूरत थी। दूसरी ओर हार्ट सर्जरी भी जरूरी थी। यदि ऐसा नहीं होता तो हार्ट पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते थे। इसलिए दोनों सर्जरी एक साथ करने का फैसला किया।

 

 

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एक साथ सर्जरी न होने पर होती यह परेशानी
डॉ. संजय गुप्ता ने कहा- \"यदि हम ब्रेस्ट से पहले हार्ट सर्जरी करते तो मरीज को हार्ट सर्जरी के बाद ठीक होने में 4 से 5 सप्ताह का समय लग सकता था, जोकि स्टेज 3 कैंसर के फैलकर स्टेज 4 में बदलने के लिए काफी होता। वहीं, हार्ट के ट्यूमर से पहले ब्रेस्ट कैंसर का इलाज शुरू करने से एक मुश्किल यह हो सकती थी कि इलाज की दवाओं से दिल पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की वजह से बीच में ही इलाज को छोड़ना पड़ सकता था।\"