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  • Solar friends deliver more than seven lakh solar products, changed lives of 3.5 million people

पहल / 2500 महिलाओं ने सोलर लाइट से 6 लाख घर रोशन किए, 8 साल में 9.5 लाख टन कार्बन उत्सर्जन रोका



सौर उत्पादों के इवेंट में अजेता शाह (बीच में) के साथ सोलर सहेलियां। सौर उत्पादों के इवेंट में अजेता शाह (बीच में) के साथ सोलर सहेलियां।
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सौर उत्पादों के इवेंट में अजेता शाह (बीच में) के साथ सोलर सहेलियां।सौर उत्पादों के इवेंट में अजेता शाह (बीच में) के साथ सोलर सहेलियां।

  • राजस्थान की सोलर सहेलियों ने 7 लाख से ज्यादा सोलर उत्पाद पहुंचाए, 35 लाख लोगों की जिंदगी बदली
  • ग्रामीण महिलाएं के प्रयास को 2017 की ग्लोबल इनोवेशन समिट में श्रेष्ठ माना गया था 
  • इस साल के आखिर तक प्रोजेक्ट यूपी, बिहार और ओडिशा में भी शुरू होगा 

Dainik Bhaskar

Jul 22, 2019, 11:06 AM IST

जयपुर. राजस्थान के अलवर, अजमेर, धौलपुर के 6 लाख घरों में रहने वाले 35 लाख लोगों की जिंदगी बदली है। इन घरों में अब चूल्हों का धुंआ नहीं फैलता, केरोसीन के लैम्प की कालिख नहीं दिखती। 2500 सोलर सहेलियों को इसका श्रेय जाता है। इन्होंने 7 लाख से ज्यादा सोलर ऊर्जा से चलित चूल्हे, लैम्प, टॉर्च, होम लाइटिंग उपकरण और स्ट्रीट लाइट इन क्षेत्रों में पहुंचाए हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी गोगला के मुताबिक, इससे करीब 9.50 लाख टन कार्बन उत्सर्जन रोकने में मदद मिली है। यह पहल अप्रवासी अजेता शाह ने 8 साल पहले की थी। 2017 में हुई ग्लोबल इनोवेशन समिट में इनका स्टार्टअप श्रेष्ठ चुना गया था।समिट में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी इवांका ट्रम्प भी शामिल हुई थी।

महिलाओं को मुफ्त मिलती है डीलरशिप

  1. अजेता शाह की कंपनी इन महिलाओं को ट्रेनिंग देने के साथ, जरूरी मदद भी उपलब्ध करवाती है। अजेता बताती हैं कि गांव की महिलाएं घर से बाहर आई हैं। उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति तो सुधारी ही पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी योगदान दिया है। हम इन सोलर सहेलियों को मुफ्त डीलरशिप देते हैं। इससे उन्हें शुरुआत में खर्च नहीं करना पड़ता।

  2. सोलर चूल्हे, लैम्प, टॉर्च और आरओ पर उन्हें 15% छूट दी जाती है। महिलाओं को उत्पाद लेने के लिए शहर नहीं आना पड़ता। इससे भी उन्हें बचत हो जााती है। अजेता के मुताबिक, इस साल के आखिर तक प्रोजेक्ट यूपी, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में भी शुरू करने जा रहे हैं, ताकि वहां की ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकें।

  3. प्रोजेक्ट में सिर्फ महिलाओं को इसलिए जोड़ा गया, क्योंकि वो ग्रामीणों को सोलर उत्पादों के फायदे बेहतर ढंग से बताती हैं। केसरोली गांव की मिशकिना के मुताबिक, वो पहले घर से नहीं निकलती थीं, अब चौपाल पर लोगों को सोलर वस्तुओं का महत्व बताती हैं। हर माह उन्हें 5 हजार रुपए तक कमा लेती हैं। महिलाएं ईकॉमर्स कंपनियों की तर्ज पर उत्पाद बेचेंगी।

  4. 5000 गांवों में रिसर्च करने के बाद प्रोजेक्ट शुरू किया

    न्यूयॉर्क में पली-बढ़ीं भारतीय मूल की अजेता शाह 2005 में भारत आईं। इस दौरान कई राज्यों में बिजली की कमी दिखी। 5000 गांवों में रिसर्च करने के बाद 2011 में अजेता ने फ्रंटियर मार्केट्स कंपनी खोली। ग्रामीण महिलाओं को सोलर सहेली के रूप में इससे जोड़ना शुरू किया। इस पहल के लिए पिछले साल ही उन्हें नीति आयोग ने वुमन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड्स से नवाजा था।

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