राजस्थान / गवरी लोकनृत्य में हिस्सा लेने वाले कलाकार 40 दिन नहीं नहाते, एक वक्त खाना खाते हैं



भीलवाड़ा में बुधवार को गवरी लोकनृत्य हुआ। भीलवाड़ा में बुधवार को गवरी लोकनृत्य हुआ।
Rajasthan folk dance Gawri
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भीलवाड़ा में बुधवार को गवरी लोकनृत्य हुआ।भीलवाड़ा में बुधवार को गवरी लोकनृत्य हुआ।
Rajasthan folk dance Gawri

  • गवरी में सभी 150 कलाकार पुरुष होते हैं, कुछ महिलाओं का किरदार निभाते हैं
  • मान्यता है कि नृत्य करने से गौरज्या माता लड़ाई-झगड़े और दु:ख से छुटकारा दिलाती हैं

Dainik Bhaskar

Sep 19, 2019, 07:07 AM IST

भीलवाड़ा. राजस्थान के भीलवाड़ा में मंगलवार को भील समाज के लोगों ने गौरज्या माता की स्थापना के लिए गवरी लोकनृत्य किया। स्थानीय लोग बताते हैं कि गवरी में हिस्सा लेने वाले कलाकारों के एक समूह में 150 सदस्य होते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले कलाकारों के लिए बहुत कड़े नियम होते हैं। जो गवरी करते हैं, वे 40 दिन तक नहीं नहाते।

 

हरी सब्जियां और मांस मदिरा का त्याग कर दिन में सिर्फ एक बार ही खाना खाते हैं। नंगे पांव रहते हैं। सवा महीने तक अपने घर ना जाकर मंदिर में ही रहते हैं और जमीन पर सोते हैं। इतना ही नहीं कलाकारों को ब्रह्मचर्य का पालन भी करना पड़ता है। खास बात यह है कि इसमें अभिनय करने वाले सभी सदस्य पुरुष ही होते है। इनमें से कुछ लोग महिला का किरदार भी निभाते हैं। 40 दिन के बाद माता को शाही सवारी के साथ जल में विसर्जित कर दिया जाता है।


मान्यता है- गौरज्या माता लड़ाई-झगड़े और दु:ख से छुटकारा दिलाती हैं
गवरी के आयोजक वजेराम गमेती ने बताया कि गौरज्या माता पार्वती की बहन हैं। ठंडी राखी के दिन कैलाश पर्वत से उनसे मिलने आती हैं। बहन को सबसे मिलाने के लिए मेवाड़ में जगह-जगह गवरी खेल का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन 40 दिन तक चलेगा। मान्यता है कि गौरज्या माता श्रद्धालुओं के संकट दूर करती हैं। साथ ही लड़ाई-झगड़े और दु:ख से छुटकारा दिलाती हैं।

 

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