रूस / खास टोपी के लिए 8 किमी दौड़ते हैं सैनिक, मानसिक ताकत भांपने के लिए तल्ख बातें की जाती हैं

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 05:28 PM IST


सम्मान पाने के लिए सैनिकों को कठिनाई भरे रास्ते पर दौड़ना पड़ता है। सम्मान पाने के लिए सैनिकों को कठिनाई भरे रास्ते पर दौड़ना पड़ता है।
दौड़ के दौरान सैनिकों को अपनी बंदूकें और सामान भी संभालना पड़ता है। दौड़ के दौरान सैनिकों को अपनी बंदूकें और सामान भी संभालना पड़ता है।
रेस के दौरान अफसर सैनिकों को उकसाते भी रहते हैं। रेस के दौरान अफसर सैनिकों को उकसाते भी रहते हैं।
russian soldiers batter each other in boxing bouts to earn the maroon beret
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सम्मान पाने के लिए सैनिकों को कठिनाई भरे रास्ते पर दौड़ना पड़ता है।सम्मान पाने के लिए सैनिकों को कठिनाई भरे रास्ते पर दौड़ना पड़ता है।
दौड़ के दौरान सैनिकों को अपनी बंदूकें और सामान भी संभालना पड़ता है।दौड़ के दौरान सैनिकों को अपनी बंदूकें और सामान भी संभालना पड़ता है।
रेस के दौरान अफसर सैनिकों को उकसाते भी रहते हैं।रेस के दौरान अफसर सैनिकों को उकसाते भी रहते हैं।
russian soldiers batter each other in boxing bouts to earn the maroon beret

  • सम्मान हासिल करने के लिए सैनिकों को कीचड़ भरे रास्ते पर दौड़ना पड़ता है
  • भारत समेत 45 देशों में खास टोपी 'मरून बेरेत' पहनने वाले सैनिक
  • सेना में खास सैनिकों को मरून बेरेत देने की परंपरा 1942 में शुरू हुई

मॉस्को. रूसी सेना में सम्मान स्वरूप एक खास टोपी ‘मरून बेरेत’ दी जाती है। इसे हासिल करने के लिए शुक्रवार को रूसी सैनिकों ने मॉरदोविया में दमखम दिखाया। इसके लिए उन्हें 8 किमी के मुश्किल रास्ते पर दौड़ना होता है। कोई सैनिक मानसिक रूप से कितना मजबूत है, इसका आकलन करने के लिए ट्रेनर्स उनसे काफी तल्ख बातें करते हैं और कभी-कभी अपशब्द भी कह देते हैं। 

 

 

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