सर्वे / नींद भगाने को हर 5वां ड्राइवर गाड़ी चलाते समय ड्रग लेता है, हर साल 47 हजार करोड़ रुपए की रिश्वत देते हैं

10 में से 9 ड्राइवरों ने स्वीकारा कि उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस लेने से पहले औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है। 10 में से 9 ड्राइवरों ने स्वीकारा कि उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस लेने से पहले औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है।
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10 में से 9 ड्राइवरों ने स्वीकारा कि उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस लेने से पहले औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है।10 में से 9 ड्राइवरों ने स्वीकारा कि उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस लेने से पहले औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है।

  • देश के 10 ट्रांसपोर्ट हब में सर्वे, सड़क परिवहन राज्य मंत्री ने रिपोर्ट जारी की
  • हर साल 57 हजार हादसों में 24 हजार लोग मारे जाते हैं, 50 हजार से ज्यादा घायल होते हैं

दैनिक भास्कर

Feb 29, 2020, 09:13 AM IST

नई दिल्ली. देश के 10 ट्रांसपोर्ट हब में सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट में दावा किया गया कि पांच में से एक ड्राइवर ट्रक चलाते समय ड्रग लेता है। वजह- नींद ना आए और गाड़ी चलाने की वजह से होने वाली थकान दूर हो सके। ऐसे में कई ड्राइवर अपना संतुलन खो देते हैं, जिससे ट्रकों से हर साल 57 हजार हादसे होते हैं। इनमें 24 हजार लोग मारे जाते हैं, जबकि 50 हजार से ज्यादा लोग घायल हो जाते हैं।  

केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में यह रिपोर्ट जारी की। उन्होंने कहा- ‘सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए इस रिपोर्ट की भी मदद ली जाएगी।’ 

सर्वे में यह भी

  • सर्वे देश के 10 ट्रांसपोर्ट हब में दिल्ली-एनसीआर, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, कानपुर, विजयवाड़ा, चेन्नई, बेंगलुरु, गुवाहाटी और कोलकाता जैसे बड़े शहर शामिल हैं। सर्वे में 1200 ट्रक ड्राइवरों को शामिल किया गया। सर्वे में शामिल 22% ड्राइवरों ने ड्रग लेने की बात भी स्वीकारी है। 
  • सर्वे में ड्राइवरों ने बताया- ‘हमें रोजाना औसतन 12 घंटे में 417 किमी गाड़ी चलानी पड़ती है। समय पर पहुंचना बड़ी चुनौती होती है। नींद और थकान न आए इसलिए ड्रग लेनी पड़ती है।’वहीं, 10 में से 9 ड्राइवरों ने स्वीकारा कि उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस लेने से पहले औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है।

6 हजार करोड़ रु. पूजा के नाम ले लेते हैं लोग
फाउंडेशन के सीईओ पीयूष तिवारी ने कहा- ‘सड़क पर चलने के दौरान ट्रक ड्राइवर हर साल 47 हजार करोड़ की रिश्वत देते हैं। इसमें पुलिस, आरटीओ, टैक्स ऑफिसर और स्थानीय ग्रुप शामिल हैं। स्थानीय ग्रुप जागरण, पूजा और वसूली के नाम पर 6 हजार करोड़ रु. हर साल लेते हैं। 84% ड्राइवरों ने कहा- वे अपने बच्चों को इस पेशे में नहीं लाना चाहते हैं।

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