रायपुर / छात्राओं ने बनाया नो पबजी क्लब, एक महीने में भाई-बहन समेत 40 की लत छुड़वाई



Schoolgirls made no pubs club
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Schoolgirls made no pubs club

  • रायपुर के एक निजी स्कूल की पहल से बच्चों में आया बड़ा बदलाव, स्टूडेंट्स नो पबजी गेम का हैंड बैंड पहन आती हैं स्कूल
  • अब ये बच्चियां इस रक्षाबंधन पर नो पबजी गेम लिखे स्लोगन वाली राखी बनाकर भाईयों को बांधेंगी

Dainik Bhaskar

Jul 29, 2019, 11:28 AM IST

रायपुर (संदीप राजवाड़े). रायपुर के एक निजी स्कूल की छात्राओं ने 'नो पबजी गेम' क्लब बनाया है। इस क्लब में वे छात्राएं शामिल हैं, जो पहले पबजी गेम खेलती थीं या कभी न कभी उसकी आदी रही हैं। क्लास 6वीं से लेकर 12वीं तक के ये बच्चे रोजाना हैंड बैंड लगाकर स्कूल आ रहे हैं, जिसमें नो पबजी गेम लिखा हुआ है। इस बैंड को पहने के बाद घरवालों के साथ आस-पड़ोस और दोस्त-रिश्तेदार भी उनसे पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों। बच्चे उन्हें इस अभियान के बारे में बताने के साथ इस गेम से हो रहे नुकसान को लेकर जानकारी देते हैं। 

 

महीनेभर से चल रही इस पहल के नतीजे भी सामने आ रहे हैं। इन बच्चों ने 40 बच्चों की पबजी गेम खेलने की लत को छुड़वा दिया है। अब ये बच्चियां इस रक्षाबंधन में अपने हाथ से नो पबजी गेम लिखे स्लोगन वाली राखी बनाकर उन्हें अपने भाईयों को बांधेंगी। वे उपहार में भी इस खेल को न खेलने की कसम लेंगी। 

 

अधिकतर बच्चे गर्मियों के खेलने लगे थे, वे पहले बाहर निकले : स्कूल की प्रिंसिपल नफीसा रंगवाला ने बताया कि इस पहल से जुड़ी अधिकतर बच्चियों ने खुद स्वीकार किया कि वे गर्मियों की छुटिट्यों में अपने बड़े भाई-बहन या अन्य दोस्तों को देखकर पबजी गेम खेलते थे। कुछ ने एक दिन तो कुछ ने 2 महीने यह गेम खेला। अब इस अभियान से जुड़ते हुए पहले तो खुद इस लत से बाहर निकले और अब अपने दूसरे बच्चों के साथ भाई-बहन को बाहर निकाल रहे हैं। क्लब में शामिल बच्चों और उनके माता-पिता से बात करने पर जानकारी मिली कि 40 से ज्यादा बच्चे जो यह गेम खेल रहे थे, वे अब इससे बाहर आ गए हैं। 

 

डब्ल्यूएचओ ने ऐसे गेम की लत को बताया मानसिक रोग : 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मोबाइल ऑनलाइन गेम खेलने वाले आदी लोगों को मानसिक रोग की कैटेगरी में शामिल किया है, जिसे गेमिंग डिसऑर्डर कहा जाता है।


माता-पिता बच्चों से बात करें
रायपुर की बाल मनोवैज्ञानिक, डॉ सिमी श्रीवास्तव ने बताया कि पबजी की तरह अन्य ऑनलाइन गेम बच्चों के मेंटल हेल्थ पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। इसके आदी बच्चों पर पहला असर उनके स्वभाव को लेकर दिखाई देता है। उनमें चिड़ाचिड़ापन बढ़ जाता है। नींद की कमी या उससे जुड़ी परेशानी होती है। जल्दी गुस्सा करना और उसकी पढ़ाई के प्रदर्शन पर में गिरावट दिखती है। इसे लेकर पैरेंट्स बच्चों से बात करें। अगर बच्चा आदी हो गया है, वह छोड़ना चाहता है तो वह अपने माता-पिता या बड़े भाई-बहन से बात करे और उनसे सलाह लें।

 

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