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अंतरिक्ष / वैज्ञानिकों ने पृथ्वी जैसा ग्रह केटू-18बी खोजा, यहां पानी और जीवन की संभावनाएं



अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने केटू-18बी की यह तस्वीर जारी की है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने केटू-18बी की यह तस्वीर जारी की है।
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने केटू-18बी की यह तस्वीर जारी की है।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने केटू-18बी की यह तस्वीर जारी की है।

  •  ‘नेचर’ पत्रिका के लेख में दावा, ग्रह का तापमान शून्य से 40 डिग्री के बीच है
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी से 111 प्रकाश वर्ष दूर केटू-18बी स्थित है
  • वैज्ञानिक पहली बार किसी ग्रह पर पानी और भाप देख रहे, इसे पृथ्वी का दूसरा वर्जन मानना अभी जल्दबाजी
     

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 08:21 AM IST

लंदन. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ऐसा ग्रह खोज निकाला है, जो पृथ्वी की तरह है। वैज्ञानिकों का कहना है- इस ग्रह पर पानी है। यह इंसानों के रहने के लिए अनुकूल भी है। इसका तापमान शून्य से 40 डिग्री के बीच है। वैज्ञानिकों ने इस ग्रह को केटू-18बी नाम दिया है। यह पृथ्वी से 111 प्रकाश वर्ष दूर है। लंदन के वैज्ञानिकों ने 'नेचर' नाम की पत्रिका में इस बारे में लिखा है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह ग्रह पृथ्वी से दोगुने आकार का है। अभी तक केटू-18बी हमारे सौर मंडल से बाहर इकलौता ऐसा ग्रह है जहां जीवन की उम्मीद जताई जा सकती है। हालांकि इसे पृथ्वी का दूसरा वर्जन या अवतार मानना जल्दबाजी होगी। खगोलशास्त्रियों की एक बड़ी चिंता यह है कि ग्रह बहुत ज्यादा दूरी पर है। इसलिए अभी वहां पहुंचकर ये पता लगा पाना मुश्किल है कि क्या वहां पहले से जीवन है।

 

ग्रह ऐसी जगह पर है, जहां पर्याप्त ऊष्मा हो सकती है
कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मोंट्रियॉल के प्रोफेसर बियर्न बेनेक इस खोज का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रोफेसर बियर्न बताते हैं- 'यह पहली बार है जब हम पृथ्वी के अलावा किसी दूसरे ग्रह पर सचमुच पानी की मौजूदगी और भाप देख रहे हैं। यह ऐसी जगह पर है जहां पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा मिल सकती है।'

 

इसका व्यास पृथ्वी के व्यास से ढाई गुना ज्यादा
प्रोफेसर बेनेक ने कहा- पृथ्वी से समानता के बावजूद ये ग्रह उससे काफी अलग भी है। हमें इसकी पृथ्वी से तुलना करते हुए थोड़ा सावधान रहना होगा। क्योंकि ये कई मायनों में अलग भी है। इसका व्यास पृथ्वी के व्यास से लगभग ढाई गुना ज्यादा है। इस तरह के ग्रहों के चारों ओर गैसों की मोटी परत होती है।

 

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