छत्तीसगढ़ / नक्सली हमले में शहीद हुआ था भाई, बहन ने उसकी राइफल को राखी बांधी



Sister joins police to fulfill martyr brother's dream
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Sister joins police to fulfill martyr brother's dream

  • कविता को पुलिस में कॉन्स्टेबल की नौकरी मिली है, यह राइफल उन्हें ही आवंटित की गई है
  • उनका कहना है कि मैं नक्सली अभियान का हिस्सा बनना चाहती हूं और भाई की मौत का बदला लेना चाहती हूं

Dainik Bhaskar

Aug 16, 2019, 09:43 AM IST

दंतेवाड़ा (अंबु शर्मा).  अक्टूबर 2018 में नक्सली हमले में शहीद हुए सहायक कॉन्स्टेबल राकेश कौशल की बहन कविता कौशल ने रक्षाबंधन के मौके पर अपने भाई की राइफल को राखी बांधी। कविता को पुलिस में कॉन्स्टेबल की नौकरी मिली है। यह राइफल उन्हें ही आवंटित की गई है। राकेश पिछले साल 31 अक्टूबर को नक्सली हमले में शहीद हो गए थे। उनके साथ  2 अन्य पुलिसकर्मियों और एक डीडी कैमरापर्सन की भी जान चली गई थी। 

 

कविता का कहना है कि भाई का सपना पूरा करने के लिए पुलिस की नौकरी ज्वाइन की है। वे मुझे पुलिस की वर्दी में देखना चाहते थे। उन्होंने भास्कर को बताया 


भइया कहते थे नक्सली कायर हैं 
"मैं तीन भाइयों की इकलौती बहन हूं। राकेश कौशल मेरे दूसरे नंबर के भइया थे। तीनों भाइयों में मेरी उनके साथ सबसे ज्यादा बनती थी। भाई मुझसे राखी बंधवाने रक्षाबंधन के दिन हर साल घर आते थे। राखी में हमेशा मुझे नए-नए सरप्राइज दिया करते थे। उनकी सबसे खास बात यह थी कि वे तब तक अपने हाथों में राखी रखते थे जब तक वह पूरी टूट न जाए। मुझसे हमेशा कहते थे कि तुम शेर भाई की बहन हो।"

 

"मां जब घबराती तब वे कहते थे कि आपने शेर बेटे को जन्म दिया है। आपका बेटा कायर नहीं है। नक्सली कायर हैं, छिपकर वार करते हैं, आपका बेटा आमने- सामने लड़कर सीने पर गोली खाकर ही मरेगा और हुआ भी वही। मुझे मेरे भइया पर गर्व है आज भी उनकी कही हर बात मेरे कानों में गूंजती है। ऐसा नहीं लगता कि वे हमें छोड़कर चले गए। भइया की शहादत के बाद जब अनुकम्पा में नौकरी की बात आई तो मैंने नौकरी को चुना, क्योंकि भाई मुझे पुलिस अफसर के रूप में देखना चाहते थे।"


"भाई के सपनों और उनकी शहादत का बदला लेने के लिए मैंने नौकरी शुरू की, लेकिन ऑफिस वर्क के दौरान यह सम्भव नहीं है। मुझे पता चला कि यहां महिला कमांडो की एक टीम बनी है, जो नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में जाती है। मैंने भी एसपी सर से इस टीम में शामिल होने की इच्छा जताई है। ताकि मैं नक्सलियों से बदला ले सकूं।"

 

"मैंने उस हथियार पर भी राखी बांधी, जिन बहनों के भाई शहादत को प्राप्त हुए हैं, उन सभी बहनों से यह कहना चाहूंगी कि हम सब भाग्यशाली हैं हमारे भाई अमर शहीद हुए हैं। अभी मुझे नौकरी में आए दो महीने हुए हैं, हथियार चलाना सीखूंगी, दंतेश्वरी फाइटर्स में शामिल होकर भइया की शहादत का बदला जरूर लूंगी।" 

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