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अमेरिका / न्यूयॉर्क के 143 साल पुराने सेंट्रल पार्क में पहली बार 3 महिलाओं की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी



Statues of three women dedicated to women's rights for first time in New York's 143-year-old Central Park
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Statues of three women dedicated to women's rights for first time in New York's 143-year-old Central Park

  • 1876 में बने इस पार्क में अब तक सभी 23 प्रतिमाएं पुरुषों की हैं
  • तीनों महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाने और समानता के लिए संघर्ष करती रहीं

Dainik Bhaskar

Oct 23, 2019, 10:40 AM IST

न्यूयॉर्क (अमेरिका). न्यूयॉर्क के चर्चित सेंट्रल पार्क में पहली बार इतिहास में अमिट छाप छोड़ने वाली तीन महिलाओं की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। अभी तक वहां पर 23 स्कल्पचर हैं, सभी पुरुषों के हैं। महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली इन तीन महिलाओं में सुजैन बी एंथोनी, एलिजाबेथ कैंडी स्टेंटन और सोजॉर्नर ट्रूथ शामिल हैं। मूर्तियों के लिए काम करने वाली गैर लाभकारी संस्था के प्रमुख पाम एलम के मुताबिक आरोप लगते रहे हैं कि ये तीनों प्रतिमाएं इस बात की प्रतीक हैं कि जब महिलाएं साथ में आ जाएं तो क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।

 

संघर्ष कर अमेरिकी महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिलवाया
सुजैन बी एंथोनी ने अमेरिकी महिलाओं को मताधिकार दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 1872 में एंथोनी को रोचेस्टर में वोटिंग करने पर गिरफ्तार किया गया था। एंथनी ने स्टेंटन के साथ मिलकर मताधिकार आंदोलन शुरू किया। हालांकि उनका ये सपना उनकी मृत्यु के 14 साल बाद पूरा हुआ। 19वीं सदी में महिलाओं को वोटिंग अधिकार मिला।

 

विश्व के पहले महिला अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया
एलिजाबेथ कैंडी स्टैंटन ने 1848 में सेनेका फॉल्स में दुनिया का पहला महिला अधिकार सम्मेलन आयोजित किया। उन्होंने एंथनी के साथ राष्ट्रीय महिला लीग भी बनाई। इन्होंने अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुषों को मताधिकार देने और महिलाओं को वंचित रखने पर आंदोलन चलाया। एंथनी और स्टैंटन की कोशिशों से ही मताधिकार कानून में बदलाव हुआ।

 

अफ्रीकी-अमेरिकी संघर्ष का प्रतीक चेहरा मानी जातीं थी
सोजॉर्नर ट्रूथ पेशे से शिक्षक थीं, पर उन्होंने गुलामी और नागरिक अधिकारों के हनन के विरोध में आंदोलन चलाए। वो अफ्रीकी-अमेरिकी संघर्ष का प्रतीक चेहरा बन गई थीं। उन्हें 19वीं सदी के प्रसिद्ध वक्ताओं में गिना जाता है। 1851 में ओहियो में दिए गए भाषण में उनके द्वारा दिया गया वक्तव्य 'मैं एक औरत नहीं हूं' यादगार बन गया था।

 

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