हरियाणा / स्कूलों में प्रेयर के बाद बच्चों को उठक-बैठक कराई जाएगी, ताकि उनकी याददाश्त अच्छी हो सके



Students will do sitting-standing after Prayer in schools
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Students will do sitting-standing after Prayer in schools

  • हरियाणा विद्यालय शिक्षा बाेर्ड की पहल, भिवानी के सर्वपल्ली राधाकृष्ण लैब स्कूल में पहले शुरू की जाएगी
  • अगर इससे बच्चों को फायदा हुआ तो फिर अगले सत्र से सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा

Jul 04, 2019, 10:19 AM IST

भिवानी (अशोक कौशिक). दिमाग चुस्त और शरीर स्वस्थ रखने के लिए हरियाणा के स्कूली बच्चे कान पकड़ कर उठक-बैठक करेंगे। उठक-बैठक सजा के ताैर पर नहीं बल्कि योग के तौर पर प्रार्थना सभा के बाद कराई जाएगी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव राजीव प्रसाद ने कहा कि यह एक्सरसाइज सुपर ब्रेन याेग है। उन्हाेंने कहा कि योग दिवस पर योग एक्सपर्ट से गहन विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया। 

 

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड स्थित सर्वपल्ली राधाकृष्ण लैब स्कूल में प्रयोग के तौर पर इसी शिक्षा सत्र से इसकी शुरुआत होगी। गुरुवार से शिक्षकों को ट्रेंड किया जाएगा। आठ जुलाई को स्कूल खुलने के बाद करीब 700 विद्यार्थियों को दो सेक्शन में बांटा जाएगा। एक सेक्शन को योग कराया जाएगा। दूसरे को नहीं। दोनों ही सेक्शन के छात्रों का साल भर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाएगा। योग करने वाले विद्यार्थियों पर प्रयाेग सकारात्मक दिखा तो अगले सत्र से विभाग को सभी स्कूलों में यह लागू करने के लिए लिखा जाएगा। राजीव प्रसाद ने बताया, "सुपर ब्रेन योग से कान के नीचे के हिस्से के एक्युप्रेशर बिंदु सक्रिय होकर मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने में सहायक हाेते हैं। इससे विद्यार्थियों की याददाश्त अच्छी होगी।"

 

एक से तीन मिनट ऐसे कराएंगे योग :

सुपर ब्रेन याेग के तहत दाएं हाथ से बाएं कान और बाएं हाथ से दाएं कान पकड़ कर उठक-बैठक करनी हाेती है। 10 से 12 उठक-बैठक के दौरान सांस पर नियंत्रण रखना हाेगा।

 

संतुलित मस्तिष्क से निकलती हैं अल्फा तरंगें, सृजन कार्य का बनता है वातावरण :

योग से मस्तिष्क के दोनों भाग संतुलित होते हैं, तो मस्तिष्क से अल्फा तरंगें निकलती हैं। अल्फा तरंगें सृजनात्मक कार्य के लिए आवश्यक वातावरण-प्रदान करती हैं। इस समय मस्तिष्क जानकारी ग्रहण करने या प्रसारित करने के लिए अत्यंत क्रियाशील हो जाता है और धीरे-धीरे मस्तिष्क के सभी प्रणालियों में सामंजस्य आने लगता है। इस से शरीर-मन की व्याधियां दूर होने लग जाती हैं।  

 

पहले गलती पर मिलती थी यह सजा :

कान पकड़ कर उठक-बैठक लगवाने की यह प्रक्रिया प्राचीन काल से शरारती या एकाग्रता की कमी वाले विद्यार्थियों को दंड स्वरूप करवाई जाती थी, जिसका मकसद मस्तिष्क को संतुलित रख स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाना था।
 

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