जापान / दुनिया के पहले उपन्यास ‘द टेल ऑफ जेंजी’ का लापता हस्तलिखित हिस्सा स्टोररूम में मिला



द टेल ऑफ जेंजी की पाण्डुलिपी द टेल ऑफ जेंजी की पाण्डुलिपी
द टेल ऑफ जेंजी। द टेल ऑफ जेंजी।
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द टेल ऑफ जेंजी की पाण्डुलिपीद टेल ऑफ जेंजी की पाण्डुलिपी
द टेल ऑफ जेंजी।द टेल ऑफ जेंजी।

  • द टेल ऑफ जेंजी का हस्तलिखित हिस्सा मोटोफुयु ओकाची के घर में मिला
  • यह परिवार मिकवा-योशिदा डोमेन वंश से ताल्लुक रखता है
  • उपन्यास इसी वंश के राजा के बेटे के युद्ध कौशल, राजनीतिक और रोमांटिक जीवन पर आधारित है

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 01:21 PM IST

टोक्यो.  दुनिया के पहले उपन्यास माने जाने वाले  ‘द टेल ऑफ जेंजी’ का लापता हस्तलिखित हिस्सा मिला है। इसे उपन्यास का पांचवां हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे 1010वीं सदी में मुरासाकी शिकिबु नाम की महिला ने पूरा किया था। यह हिस्सा टोक्यो में रहने वाले मोटोफुयु ओकाची के घर के स्टोररूम में मौजूद था। इस परिवार का संबंध मिकवा-योशिदा डोमेन वंश से बताया जाता है। 

 

54 चैप्टर वाले उपन्यास ‘द टेल ऑफ जेंजी’ को 1010 वीं से लेकर 11वीं सदी के बीच लिखा गया था। उपन्यास मिकवा-योशिदा डोमेन वंश के जापानी सम्राट के बेटे जेंजी के युद्ध कौशल, राजनीतिक और रोमांटिक जीवन पर आधारित है। इसमें हियान कोर्ट की एक महिला के साथ राजा के बेटे की प्रेम कहानी है। हस्तलिखित इस उपन्यास का ज्यादातर हिस्सा अब उपलब्ध नहीं है। माना जाता है कि उपन्यास के सबसे पुराने संस्करणों को कवि फुजिवारा टीका द्वारा दोबारा लिखा गया था, जिनकी मृत्यु 1241 में हुई थी। शोध बताते हैं, 54 में से 4 अध्याय ही टीका द्वारा दोबारा लिखा जाना अब तक प्रमाणित हैं, लेकिन अब टीका द्वारा लिखित पांचवें अध्याय में प्रेमिका से पत्नी बनने के बाद मुरासाकी द्वारा धोखे से जेंजी की हत्या की कहानी भी सामने आई है।

 

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मौजूदा प्रति कवि टीका की है: बुंको

जापानी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संस्थान की नींव रखने वाले विशेषज्ञ रेइजेइक शिगुरुटी बुन्को ने माना, "उपलब्ध उपन्यास की प्रति का हिस्सा कवि टीका द्वारा लिखित है। इसका अधिकांश हिस्सा दूसरी प्रतियों से मिलता है। हालांकि, इनमें व्याकरण का अंतर जरूर है।"

 

जेंजी की कहानी टीका ने 250 साल बाद लिखी

क्योटो विश्वविद्यालय की प्रोफेसर जुंको यामामातो ने बताया, द टेल ऑफ जेंजी की पाण्डुलिपि पर पहले भी शोध हो चुके हैं। यह जेंजी के 250 साल बाद पूरी तरह लिखी और संपादित की गई। टीका द्वारा दोबारा लिखित और संपादित उपन्यास की पाण्डुलिपि शोध के लिए उपलब्ध है।

 

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