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एशिया में पहली बार ट्रांसप्लांटेड हाथों का रंग तीन साल में बदला, ऑपरेशन के वक्त अलग था

एक वर्ष पहले
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श्रेया सिद्दनागौदर के हाथ ऑपरेशन के बाद (बाएं) और अब बदले हुए रंग के साथ (दाएं)। - Dainik Bhaskar
श्रेया सिद्दनागौदर के हाथ ऑपरेशन के बाद (बाएं) और अब बदले हुए रंग के साथ (दाएं)।
  • पुणे की श्रेया सिद्दनागौदर ने बताया, 2017 में जब उसके हाथ किसी और के हाथ से ट्रांसप्लांट हुए थे तब अलग रंग के थे
  • दुनियाभर में 200 के करीब हाथ ट्रांसप्लांट हुए हैं, लेकिन स्किन टोन के बदलने को ऐसा कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है

पुणे. महाराष्ट्र के पुणे शहर की रहने वाली 21 साल की श्रेया सिद्दनागौदर के हाथों का रंग तीन साल में पूरे शरीर जैसा हो गया। तीन साल पहले जब उन्हें एक साउथ इंडियन युवक के हाथ लगाए थे तब उनका रंग बिल्कुल अलग था। दरअसल, 2016 में एक हादसे के बाद श्रेया ने अपने दोनों हाथों को गंवा दिया था। 2017 में उनका इंटर-जेंडर हैंड ट्रांसप्लांट हुआ। यह सर्जरी कोच्चि के अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) में हुई। यह एशिया का हैंड ट्रांसप्लांट था। 


श्रेया कहती हैं, ‘‘मुझे नहीं पता हाथों की स्किन टोन कैसे बदल गई। पहले मुझे अपने हाथ अपने नहीं लगते थे। इसे लेकर मैं चिंतित भी रही, लेकिन अब लगता है। यह मेरे ही हैं। मुझे केरल के रहने वाले एक लड़के की मौत के बाद उसके हाथ लगाए गए थे। हालांकि, पहले मैंने प्रोथेस्टिक हाथों का इस्तेमाल करने की कोशिश भी थी, लेकिन बाद में सर्जरी कराना ही तय किया था। ऑपरेशन के बाद हाथों का रंग पूरे शरीर के जैसा नहीं था।’’

हॉर्मोनल बदलाव भी कारण हो सकता है
ऑपरेशन में टीम का हिस्सा रहे प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर मोहित शर्मा ने कहा, इंटर-जेंडर हैंड ट्रांसप्लांट पर ज्यादा शोध नहीं हुआ है। अनुमान है, युवती में हॉर्मोनल बदलावों के कारण ऐसा हो सकता है। हालांकि, दुनियाभर में 200 के करीब हाथ ट्रांसप्लांट हुए हैं, लेकिन किसी भी मामले में स्किन टोन में बदलाव का ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है। संभवत: यह पहला केस हो।

श्रेया सिद्दनागौदर।
श्रेया सिद्दनागौदर।

बदलाव रिकॉर्ड कर रहे हैं
एम्स में प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सुब्रमन्या अय्यर ने मीडिया को बताया, ‘‘हम साइंटिफिक जर्नल में हाथ ट्रांसप्लांट के दो मामले पब्लिश करना चाहते हैं। हमने अभी श्रेया के हाथों के रंग में बदलाव को रिकॉर्ड किया है, लेकिन अंगुलियों और हाथ की बनावट में बदलाव को समझने के लिए थोड़ा और शोध करना होगा। शोध के प्रकाशन में अभी समय लगेगा।'’