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अमेरिका / चंद्रमा से गिरे 5.5 किलो के उल्कापिंड की होगी नीलामी, 3.7 करोड़ रुपए रखी गई बेस प्राइस



यह उल्कापिंड 2017 में पश्चिमोत्तर अफ्रीका के मॉरिटेनिया से मिला था।  यह उल्कापिंड 2017 में पश्चिमोत्तर अफ्रीका के मॉरिटेनिया से मिला था। 
माना जा रहा है कि उल्कापिंड एक हजार साल पहले धरती पर गिरा था। माना जा रहा है कि उल्कापिंड एक हजार साल पहले धरती पर गिरा था।
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यह उल्कापिंड 2017 में पश्चिमोत्तर अफ्रीका के मॉरिटेनिया से मिला था। यह उल्कापिंड 2017 में पश्चिमोत्तर अफ्रीका के मॉरिटेनिया से मिला था। 
माना जा रहा है कि उल्कापिंड एक हजार साल पहले धरती पर गिरा था।माना जा रहा है कि उल्कापिंड एक हजार साल पहले धरती पर गिरा था।

  • चंद्रमा पृथ्वी से 3 लाख 84 हजार किमी दूर
  • करीब 1000 साल पहले धरती से टकराया था यह उल्कापिंड
     

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 05:29 PM IST

वॉशिंगटन. चंद्रमा से गिरे एक उल्कापिंड की अमेरिका के बोस्टन में नीलामी होगी। 5.5 किलो के इस उल्कापिंड को द मून पजल नाम दिया गया है। इसे बोस्टन का आरआर हाउस नीलाम करेगा।18 अक्टूबर तक इसकी ऑनलाइन बोली लगाई जा सकेगी।

पिछले साल अफ्रीका से मिला था उल्कापिंड

  1. नीलामीघर के मुताबिक- पृथ्वी पर ज्यादातर उल्कापिंड मंगल और बृहस्पति ग्रह से आते हैं। लेकिन यह चंद्रमा से आया है, इसलिए खास और अलग है। यह 2017 में पश्चिमोत्तर अफ्रीका के मॉरिटेनिया से मिला था। पृथ्वी से चंद्रमा 3 लाख 84 हजार किलोमीटर दूर है।

  2. पश्चिमोत्तर अफ्रीका में गिरने की वजह से इसका नाम एनडब्ल्यूए 11789 रखा गया था। माना जा रहा है कि यह उल्कापिंड करीब 1000 साल पहले धरती से टकराया था। आरआर ऑक्शन के मुताबिक- उल्कापिंड का कंपोजिशन काफी अलग है। दुनिया में अब तक मिले उल्कापिंडों में यह सबसे महत्वपूर्ण है।

  3. द मून पजल उल्कापिंड छह हिस्सों में बंटा है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा तीन किलो का है। एयरोलाइट मेटियोराइट के सीईओ ज्योफ नॉटकिन का कहना है कि चंद्रमा से आए ज्यादातर उल्कापिंड छोटे होते हैं। इनका आकार बादाम या गोल्फ बॉल जितना होता है।

     

    Meteorite

  4. नॉटकिन के मुताबिक- जैसे ही हमने पजल को देखा, हमें यह असामान्य लगा। सामान्य रूप से चांद से इतने बड़े उल्कापिंड नहीं आते। ऐसा आप पूरी जिंदगी में एकाध बार ही देख सकते हैं।

  5. नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम इस उल्कापिंड को खरीद सकता है, लेकिन नीलामीघर का कहना है कि किसी व्यक्ति के पास भी इस अनोखे उल्कापिंड को खरीदने का मौका है। क्योंकि कोई अंतरिक्ष यात्री चांद से पत्थर लेकर आएगा तो वह अमेरिकी संपत्ति माना जाएगा।

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