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न्यू जर्सी. अमेरिका के 18 साल के मैथ्यू व्हिटेकर जन्म से दृष्टिहीन हैं। बावजूद इसके वे दो साल की उम्र से पियानो बजा रहे हैं। मैथ्यू आज कुछ भी सुनकर कोई भी वाद्ययंत्र बगैर देखे बजा लेते हैं। खुद गीत बनाते हैं और उन्हें स्वरबद्ध करते हैं। कैनेडी सेंटर सहित कई मशहूर स्थानों पर परफॉर्म कर अवॉर्ड जीत रहे हैं। उनके कलेक्शन बहुत ही उम्दा किस्म के हैं।
मैथ्यू के टैलेंट को देखकर वैज्ञानिक और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. चार्ल्स लिंब आश्चर्य में पड़ गए। वे सोचने लगे कि इसके दिमाग में ऐसा क्या है, जिससे वह दृष्टिहीन होकर भी इस तरह परफॉर्म कर लेता है, जिसे करने के लिए देख सकने वाले व्यक्ति को भी परेशानी होगी। डॉ. लिंब ने मैथ्यू के परिजन से परमीशन लेकर उसकी दो बार एमआरआई की। साथ ही उसके दिमाग की रीडिंग, मॉनीटरिंग शुरू कर दी।
डॉ. लिंब आश्चर्यचकित थे कि हमारे ब्रेन का वह पार्ट जो देखकर अध्ययन करता है, मैथ्यू के ब्रेन में वह पार्ट तब सक्रिय हो जाता है, जब वह म्यूजिक सुनता है (विजुअल कार्टेक्स वह पार्ट होता है जो देखने वाली सारी इन्फॉर्मेशन प्रोसेस करता है।) यानी कि सामान्य मनुष्य में देखकर इन्फॉर्मेशन प्रोसेस करने वाला दिमाग का हिस्सा, म्यूजिक समझने के लिए काम कर रहा है।
जिस म्यूजिकल नोट के लिए 5 लोग चाहिए, मैथ्यू वह अकेला कर लेता है
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