पुणे / महिलाओं के लिए वॉशरूम-ऑन-व्हील्स शुरू; इसमें ब्रेस्टफीडिंग के अलावा डायपर, नेपकिन खरीदने की भी सुविधा

वॉशरूम-ऑन-व्हील्स की देररेख सिर्फ महिलाएं ही करती हैं। वॉशरूम-ऑन-व्हील्स की देररेख सिर्फ महिलाएं ही करती हैं।
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वॉशरूम-ऑन-व्हील्स की देररेख सिर्फ महिलाएं ही करती हैं।वॉशरूम-ऑन-व्हील्स की देररेख सिर्फ महिलाएं ही करती हैं।

  • उद्यमी उल्का सादलकर और राजीव खेर ने वॉशरूम-ऑन-व्हील्स सर्विस को शुरू किया है 
  • कोई भी महिला पांच रुपए के शुल्क में वॉशरूम और ब्रेस्टफीडिंग के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 02:37 PM IST

पुणे (महाराष्ट्र). पुणे में वॉशरूम-ऑन-व्हील्स' सुविधा इन दिनों चर्चा में। कोई भी महिला पांच रुपए के शुल्क में वॉशरूम और ब्रेस्टफीडिंग के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा, यहां से कोई भी महिला सैनेटरी नेपकिन और डायपर खरीद सकती है।

उद्यमी उल्का सादलकर और राजीव खेर ने इसे शुरू किया है। 12 बसों को टॉयलेट में बदला गया है। इनका दावा है कि हर रोज औसतन 200 से ज्यादा महिलाएं इनका इस्तेमाल करती हैं। बिजली के लिए इन बसों की छत पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। 

देश के अलग-अलग शहरों में 1000 से ज्यादा टॉयलेट बनाएंगे 

  • सादलकर ने बताया हमें लगता है कि महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित वॉशरूम मिलना चाहिए और यह उनका मूलभूत अधिकार है। इसलिए हमारी कोशिश है कि अगले पांच साल में हम देश के अलग-अलग शहरों में 1000 से ज्यादा ऐसे टॉयलेट बनाएं। इनका कहना है कि महिलाओं ने भी इस काम की सराहना की है।
  • वॉशरूम का इस्तेमाल करने वाली 18 साल की सुवर्णा डोंगरे कहती हैं कि ऐसी सेवा सभी जगह होनी चाहिए। ये टॉयलेट बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित हैं। इन टॉयलेट्स में काम करने वाली 40 साल की मनीषा अधव कहती हैं कि महिलाओं के लिए काम करने के लिए मुझे अच्छा लगता है। वह बताती हैं कि आसपास सार्वजनिक वॉशरूम नहीं होने की वजह से यहां महिलाएं दूर-दूर से आती हैं। 

रखरखाव नहीं होता सार्वजनिक शौचालयों का 
केंद्र सरकार के क्लीन इंडिया प्रोग्राम के तहत देश भर में लाखों टॉयलेट बनाए गए हैं। लेकिन पानी और बिजली की कमी की वजह से ये इस्तेमाल नहीं होती हैं। राज्य सरकारें भी इनका रखरखाव नहीं कर पाती हैं। 

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