2400 सैनिकों की कुर्बानी के बाद वतन लौटेगी सेना:150 लाख करोड़ खर्च और 20 साल बाद अफगानिस्तान से निकलेगा अमेरिका

वॉशिंगटन6 महीने पहले
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यह तस्वीर अप्रैल 2010 की है। अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में लैंड कर रहे थे। इसी के बाद अमेरिका ने 2011 में लादेन को मारा था। - Dainik Bhaskar
यह तस्वीर अप्रैल 2010 की है। अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में लैंड कर रहे थे। इसी के बाद अमेरिका ने 2011 में लादेन को मारा था।

अमेरिकी सैनिक 20 साल बाद एक बेहद लंबे और महंगे युद्ध के बाद अफगानिस्तान से वापस अपने वतन लौटेंगे। 9/11 हमले की 20वीं बरसी यानी 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिक यहां से निकल जाएंगे। पहले यह समयसीमा 1 मई थी लेकिन ढाई हजार से ज्यादा सैनिकों की वापसी को देखते हुए समय बढ़ा दिया गया। अलकायदा के 9/11 हमले के बाद साल 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में सेना उतारी थी। इस युद्ध में अमेरिका ने 2400 सैनिकों को खोया है।

साथ ही इस युद्ध पर अमेरिका ने 2 ट्रिलियन डॉलर यानी 150 लाख करोड़ रुपए के करीब खर्च किए हैं। मई 2011 में अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया लेकिन न तो तालिबान को खत्म कर पाया और न ही अफगानिस्तान में शांति स्थापित कर पाया है। बाइडेन प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि लंबी बहस और कई रिपब्लिकन के विरोध के वाबजूद राष्ट्रपति बाइडेन ने यह निर्णय लिया है।

राष्ट्रपति का कहना है कि अगर स्थितियों को आधार बना कर देखेंगे तो अमेरिकी सैनिक कभी वहां से वापस ही नहीं लौट पाएंगे। हालांकि इस निर्णय के बाद यह बहस शुरू हो गई है अमेरिका के वापसी के बाद इस इलाके में फिर से युद्ध की स्थितियां न बन जाएं।

क्या अफगानिस्तान में सिविल वार जैसी स्थिति बन सकती है?
अफगानिस्तान की टर्की, कतर जैसे देशों के साथ कॉन्फ्रेंस होनी है। टर्की नाटो का भी हिस्सा है और अभी के समय बहुत पावरफुल है। टर्की के कदम बताएंगे कि अफगान में कैसी स्थिति बनेगी। वैसे सिविल वार जैसी संभावना बहुत कम है।

एशिया की शांति पर क्या असर?
एशिया की शांति पर खासा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि अब तालिबान पहले की तरह मजबूत नहीं है। ये तो तय है कि पाकिस्तान पूरी तरह से तालिबान को मदद करेगा। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि वापसी के बाद अमेरिका का रोल किस तरह का रहेगा। तालिबान ने हरकत की तो अमेरिका एयर अटैक जैसे कदम उठाएगा।

भारत पर इसका क्या असर होगा? फायदेमंद होगा या नुकसानदायक?
हमें न नुकसान है और न फायदा। भारत तो अफगानिस्तान की हर तरह से मदद कर रहा है। हम अफगानिस्तान की सेना को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। भारत आगे मदद के लिए अपने सैनिक भी भेज सकता है। भारत के नजरिए से शांति रहे तो बेहतर है, क्योंकि पाक और तालिबान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। टर्की अगर अफगानिस्तान की मदद करता है तो पूरे इलाके में शांति बनी रहेगी।

अफगानिस्तान में तालिबान और आतंकवाद पर क्या असर होगा?
अफगानिस्तान में अभी अफगानी तालिबान और पाकिस्तानी तालिबान सक्रिय हैं। इसके साथ ही सीरिया का आईएसआईएस, हकानी ग्रुप भी पाकिस्तान संरक्षित तालिबान जैसे आंतकी संगठन को मदद करता है। लेकिन आंतकी संगठन तालिबान अब कमजोर हो गया है। भले ही अफगान की 60 फीसदी जमीन पर तालिबान का प्रभाव हो लेकिन अफगानिस्तान की फौज लड़ भी रही है और मरने के लिए तैयार भी है। ऐसे में हम अफगानिस्तान को मजबूत ही कहेंगे।

यह सामान्य वापसी है या कुछ और?
अमेरिका अभी अफगानिस्तान में 7 जगहों पर मजबूती से बैठा है। रणनीति के तहत वो केवल सेना को वापस बुला रहा है। लेकिन वापसी के बाद भी अमेरिका सक्रिय रहेगा। ऐसा नहीं रहेगा कि फिर वो ध्यान न रखे। अगर तालिबान हमलावर रहा तो वो वापस सेना भेज सकता है और एयर अटैक जैसे कदम भी उठा सकता है।
(भास्कर एक्सपर्ट: पीके चक्रवर्ती, मेजर जनरल (रि.), रक्षा विशेषज्ञ)

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