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अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन का सर्वे:वैक्सीन लगवा चुके 50% लोग सामान्य जीवन जीने को लेकर उदास; बोले- भरोसा कायम होने में वक्त लगेगा

3 महीने पहले
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वैक्सीन लगवाने के बाद भी लोगों से मिलजुल नहीं रहे अमेरिकी। - Dainik Bhaskar
वैक्सीन लगवाने के बाद भी लोगों से मिलजुल नहीं रहे अमेरिकी।

34 साल की क्लाउडिया कैंपोस एक कार रेंटल कंपनी में काम करती हैं। वैक्सीन लगवाने के बावजूद वह अपने काम पर हर समय मास्क पहने रहती हैं। उन्होंने मास्क प्रिंट भी करवाए हैं। इन पर लिखा है- ‘मुझे वैक्सीन लग चुकी है। पर मैं आप पर भरोसा करने को तैयार नहीं हूं।’ कैंपोस का स्लोगन उनके जैसे ही कई अमेरिकी लोगों की भावना व्यक्त करता है, जो वैक्सीन लगवाने के बाद भी सामान्य जीवन जीने को लेकर उदास हैं।

अमेरिका के बीमारी नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के मुताबिक, अभी तक 44% अमेरिकी पूरी वैक्सीन लगवा चुके हैं। ये लोग मास्क और यात्रा की पाबंदियां हटा सकते हैं और एक दूसरे से मिल-जुल सकते हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश लोगों का कहना है कि वे पहले जैसी सामान्य जिंदगी जीने के लिए अभी तैयार नहीं हैं।

मार्च में अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के सर्वे में शामिल हुए आधे से ज्यादा लोगों ने कहा था कि वे वैक्सीन लगवाने के बावजूद लोगों से मिलने-जुलने में असहज हैं। 25 मई के सर्वे में वैक्सीन लगवा आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि वे अभी भी घरों के बाहर निकलने पर मास्क पहनते हैं।

हालिया सीडीसी डेटा के मुताबिक फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन लगवा चुके लोगों को वैक्सीन नहीं लगवाने वाले लोगों की तुलना में संक्रमण होने की आशंका 91% तक नहीं है। अगर उन्हें संक्रमण होता भी है तो उनसे दूसरे लोगों में कोविड-19 का प्रसार फैलने की बहुत कम संभावना है।

नया सोशल कोड अपनाने, फिर छोड़कर जीने की उम्मीद
अमेरिका में अभी भी रोजाना हजारों लोग कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं। यही वजह है कि वैक्सीन लगवा चुके लोग भी दूसरों से मिलने-जुलने में झिझक रहे हैं। खासतौर पर यदि वे वैक्सीन नहीं लगवाने वाले लोगों के आसपास रहते हैं। इंडियाना के मेंटल हेल्थ काउंसलर रॉब डैंजमैन का कहना है कि यह बहुत ही दुर्लभ है कि एक पूरे समाज से केवल एक साल में नया सोशल कोड अपनाने और फिर उसे छोड़कर वापस पुराने में लौटने की उम्मीद की जाए।