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यूएनएफपीए की रिपोर्ट में खुलासा:57 देशों की 50 फीसदी महिलाओं को अपने शरीर पर ही अधिकार नहीं, प्रतिबंध उन्हें बिना किसी डर के फैसले लेने से रोकते हैं

2 महीने पहले
‘मेरा शरीर मेरा अपना है’ शीर्षक पर यूएनएफपीए की एक रिपोर्ट जिसमें 57 देशों के महिलाओं के हालात के बारे में बताया गया है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दुनिया में 50% महिलाओं को अपने ही शरीर पर अधिकार नहीं है। अध्ययन का शीर्षक है ‘मेरा शरीर मेरा अपना है’। इसमें 57 देशों में महिलाओं के हालात के बारे में बताया है।
प्रतिबंध - यौन संबंध, गर्भ-निरोध या स्वास्थ्य सेवाओं को हासिल करने में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

फैसले - महिलाओं पर लगे कई प्रतिबंध उन्हें बिना किसी डर के अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने से रोकते हैं। कई प्रतिबंध ऐसे भी हैं कि महिलाओं के शरीर से जुड़े फैसले कोई और ले लेता है।

असर - स्वायत्ता की कमी की वजह से महिलाओं को गंभीर क्षति पहुंचती है, साथ ही आर्थिक उत्पादकता भी कम होती है। स्वास्थ्य प्रणाली और न्यायिक व्यवस्था का खर्च भी बढ़ता है।

कानून - 20 देशों में ऐसे कानून हैं जिनकी मदद से कोई दुष्कर्म पीड़िता से शादी कर सजा से बच सकता है। 43 ऐसे देशों में शादीशुदा जोड़ों के बीच दुष्कर्म को लेकर कोई कानून नहीं है। 30 देशों में महिलाओं के बाहर आने-जाने पर प्रतिबंध हैं।

हिंसा - महिलाओं पर अंकुश लगाने के लिए दुष्कर्म, जबरन स्टेरलाइजेशन, कौमार्य परीक्षण और जननांगों को अंगभंग जैसे हमले किए जाते हैं।

यौन शिक्षा - सिर्फ 56% देशों में यौन शिक्षा उपलब्ध कराने के कानून या नीतियां हैं। यूएनएफपीए की निदेशक नटालिया कनेम के अनुसार, ‘करोड़ों महिलाओं और लड़कियों को अपने ही शरीर पर अधिकार नहीं है। उनकी जिंदगी दूसरों के अधीन है।’

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