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ऑस्ट्रेलिया के म्यूजियम में रखी 500 साल पुरानी नटराज की मूर्ति चोरी की निकली, भारत को लौटाई जा सकती है

1970 के दशक में तमिलनाडु के एक मंदिर से गायब हो गई थी मूर्ति

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2018, 11:31 AM IST
500 yrs old dancing shiva statue in australia art gallery stolen from india

  • एशियन आर्ट क्यूरेटर ने सितंबर 2016 में बताया कि नटराज की मूर्ति चुराई गई थी
  • 1976 से 2001 तक प्राचीन काल की 19 वस्तुएं कानूनी प्रक्रिया के बाद विदेश से भारत लाई गईं

कैनबरा. ऑस्ट्रेलिया के म्यूजियम में रखी 500 साल पुरानी नटराज (भगवान शिव) की मूर्ति चोरी की निकली। आर्ट गैलरी ने इस बात की पुष्टि की है। नटराज की मूर्ति को भारत वापस भेजा जा सकता है। ऑस्ट्रेलियन चैनल एबीसी के मुताबिक- नटराज की यह मूर्ति 16वीं शताब्दी की थी, जो 1970 के दशक में तमिलनाडु के नेल्लई स्थित एक मंदिर से गायब हो गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक- नेल्लई के मंदिर से नटराज समेत चार मूर्तियां चुराई गई थीं। चोरों ने मंदिर का ताला तोड़कर वारदात को अंजाम दिया। 1982 तक मूर्तियों को गायब माना गया। पुलिस किसी भी संदिग्ध को पकड़ने में नाकाम रही।

चोरी का 2 साल पहले पता लगा : एडीलेड स्थित आर्ट गैलरी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया (एजीएसए) का कहना है, "हम मूर्ति के बारे में शोध कर रहे थे। इसी दौरान एशियन आर्ट क्यूरेटर ने सितंबर 2016 में बताया कि नटराज की मूर्ति चुराई गई थी। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई अफसरों के बीच बात हो चुकी है। हमने दस्तावेज सौंप दिए हैं। 30 दिन में हम मूर्ति को भारत को वापस कर सकते हैं।'' मंदिर निर्माण कला के जानकार और द अाइडल थीफ किताब के लेखक कुमार ने बताया- एजीएसए द्वारा दी गई जानकारी सही है। 2016 में हमारे आर्काइव फोटो से मूर्ति के बारे में जानकारी मिली। कुमार कहते हैं- चौंकाने वाली बात यह है कि दो साल पहले चोरी का पता लगने के बाद ऑस्ट्रेलिया के अफसर चुप रहे। क्या यही उनकी नैतिकता है।

जल्द सौंपी जाए मूर्ति : कुमार के मुताबिक, "चोरी की गई मूर्ति आज भी चुराई गई चीज ही है। प्राचीन काल की चीजों के लिए भारत का अपना कानून है। मूर्ति सौंपने की प्रक्रिया तभी हो पाएगी, जब दोनों देशों की सरकारें शामिल हों।'' एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक- आर्ट गैलरी ने 2001 में 76 सेमी ऊंची नटराज की मूर्ति 3 लाख 30 हजार डॉलर (करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपए) में खरीदी थी। आर्ट गैलरी ने 24 चीजों में कुछ समस्याएं बताई थीं। केवल नटराज की मूर्ति पर भारत ने दावा किया था। दस्तावेज के मुताबिक- मूर्ति को ब्रिटेन के बिचौलियों के जरिए एक यूरोपियन व्यक्ति से खरीदा गया था।

बिचौलियों ने दी थी गलत जानकारी : आर्ट गैलरी के तत्कालीन निदेशक रॉन रेडफोर्ड से बिचौलियों ने कहा था कि मूर्ति चोरी की नहीं है। लेकिन डीलर ने बताया था कि मूर्ति के मालिक का पता नहीं है। ये पहली बार नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार भारत से चुराई गई मूर्तियां खरीदी हों।

पहले अमेरिका के डीलर से खरीदी थी मूर्ति : इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ने 50 लाख डॉलर में भगवान शिव की मूर्ति न्यूयॉर्क के डीलर सुभाष कपूर से खरीदी थी। न्यूयॉर्क की कोर्ट ने फ्रीडमैन को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि भगवान शिव की मूर्ति भारत सरकार की संपत्ति है, जो तमिलनाडु के अरियालूर स्थित मंदिर से चुराई गई थी। 1976 से 2001 तक प्राचीन काल की 19 वस्तुएं कानूनी प्रक्रिया या सैटलमेंट के बाद विदेश से भारत लाई गईं। 2001 के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ऐसी कोई कामयाबी नहीं मिली।

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