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तस्वीरों में यूक्रेन जंग का भयावह पहलू:हर मिनट 55 बच्चे रिफ्यूजी बनने को मजबूर, अब तक 30 लाख यूक्रेनियों ने वतन छोड़ा

कीव5 महीने पहले

यूक्रेन पर रुसी हमले के बाद यूरोप में शरणार्थियों की बाढ़ आ गई है। इसका असर यूक्रेनी बच्चों पर भी पड़ा है। UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक, यूक्रेन में जंग की शुरूआत से अब तक कुल 30 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। इनमें आधी संख्या बच्चों की है। जंग शुरू होने के बाद से हर मिनट 55 बच्चे रिफ्यूजी बनने को मजबूर हैं। यानी लगभग हर सेकेंड में एक बच्चा रिफ्यूजी बन गया है।

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कई बच्चों को मां और भाई-बहनों के साथ कठिन सफर तय करना पड़ा है। इन बच्चों के माता-पिता इस बात से परेशान हैं कि उन्हें कैसे समझाया जाए कि उनके साथ क्या हुआ। कुछ बच्चों ने सुना कि वे छुट्टी पर जा रहे हैं। कुछ को कहा गया कि हमारे घर सुरक्षित नहीं हैं और पापा को देश की रक्षा के लिए वहीं रुकना होगा।

रूसी हमले के बाद यूक्रेन के 4.4 करोड़ नागरिकों में से करीब 30 लाख ने देश छोड़ दिया है।

पढ़िए ऐसे ही 2 रिफ्यूजी बच्चों की कहानियां….
वेरोनिका के दादा-दादी और पिता यूक्रेन में ही छूट गए
9 साल की वेरोनिका लोतोवा जब यूक्रेन के डोनबास इलाके से बाहर निकलकर पड़ोसी देश पोलैंड पहुंची है। वह अपने साथ टेडी बियर लेकर आई। वेरोनिका अपने दादा-दादी के साथ एक टीवी शो देखती थी, जिसमें भालू के कैरेक्टर का नाम वोलोडा है।

उसके परिवार ने जंग से पहले उसके दादा-दादी को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने देश नहीं छोड़ने का फैसला किया। वेरोनिका की मां को चिंता है कि उसके दादा-दादी और वेरोनिका के पिता बम हमले में नहीं बचेंगे।

डायना को जन्मदिन की रात शेल्टर होम में गुजारनी पड़ी
सुमी शहर की रहने वाली डायना उस दिन 7 साल की हो गई थी, जिस दिन रूसी सैनिकों ने उनके शहर सुमी पर गोलाबारी शुरू की। डायना को जन्मदिन की रात शेल्टर होम में गुजारनी पड़ी। कुछ दिन बाद, वह अपनी मां और 11 साल की बहन के साथ पश्चिमी यूक्रेन के लिए एक ट्रेन में सवार हो गई।

उसके पिता रूसी हमले में घायल होने की वजह से साथ नहीं आ सके। जब डायना अपने गालों को फुला कर अपनी ड्राइंग की ओर देख रही थी, उस दौरान उसकी मां एलोना की आंखों में आंसू आ गए।

अब 10 फोटोज में देखिए यूक्रेनी पलायन करने वाले बच्चों का सफर...

ये बच्ची यूक्रेन से बाहर निकलने के बाद रोमानिया बॉर्डर पर एक बस में सवार है और उदास आंखों से खिड़की के बाहर देख रही है। फोटो- 13 मार्च।
ये बच्ची यूक्रेन से बाहर निकलने के बाद रोमानिया बॉर्डर पर एक बस में सवार है और उदास आंखों से खिड़की के बाहर देख रही है। फोटो- 13 मार्च।
पोलैंड के क्राको में रेलवे स्टेशन पर अपने बच्चों के साथ बैठी यूक्रेनी महिला। ये बच्चों के साथ जर्मनी के बर्लिन शहर जा रही है। फोटो- 15 मार्च
पोलैंड के क्राको में रेलवे स्टेशन पर अपने बच्चों के साथ बैठी यूक्रेनी महिला। ये बच्चों के साथ जर्मनी के बर्लिन शहर जा रही है। फोटो- 15 मार्च
पौलैंड जाने के लिए यूक्रेन के लीव में एक रेलवे स्टेशन पर जमा लोगों की भीड़। इस भीड़ में एक पिता अपनी बच्ची को कंधे पर बैठाकर ले जा रहा है। फोटो- 15 मार्च।
पौलैंड जाने के लिए यूक्रेन के लीव में एक रेलवे स्टेशन पर जमा लोगों की भीड़। इस भीड़ में एक पिता अपनी बच्ची को कंधे पर बैठाकर ले जा रहा है। फोटो- 15 मार्च।
लीव के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के लिए अपनी बारी का इंतजार करता यूक्रेनी। गोद में बेसुध उसकी छोटी बहन सो रही है। फोटो- 14 मार्च।
लीव के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के लिए अपनी बारी का इंतजार करता यूक्रेनी। गोद में बेसुध उसकी छोटी बहन सो रही है। फोटो- 14 मार्च।
यूक्रेन से लोग भाग कर बेल्जियम भी पहुंच रहे हैं। यहां की राजधानी ब्रसेल्स में माइग्रेशन ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। फेंसिंग से बाहर झांकता बच्चा। फोटो- 14 मार्च।
यूक्रेन से लोग भाग कर बेल्जियम भी पहुंच रहे हैं। यहां की राजधानी ब्रसेल्स में माइग्रेशन ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। फेंसिंग से बाहर झांकता बच्चा। फोटो- 14 मार्च।
पोलैंड के क्राको में रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के अंदर सवार बच्चे। ये बच्चे परिवार के साथ पोलैंड से जर्मनी के बर्लिन शहर जा रहे हैं। फोटो- 15 मार्च
पोलैंड के क्राको में रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के अंदर सवार बच्चे। ये बच्चे परिवार के साथ पोलैंड से जर्मनी के बर्लिन शहर जा रहे हैं। फोटो- 15 मार्च
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में माइग्रेशन ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ को देखता यूक्रेनी बच्चा। फोटो- 15 मार्च।
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में माइग्रेशन ऑफिस के बाहर लोगों की भीड़ को देखता यूक्रेनी बच्चा। फोटो- 15 मार्च।
रोमानिया के बुखारेस्ट में एक अस्थायी शेल्टर होम में सोता यूक्रेनी बच्चा। यूक्रेन से भारी संख्या में रिफ्यूजी पड़ोसी देश रोमानिया पहुंच रहे हैं। फोटो- 13 मार्च।
रोमानिया के बुखारेस्ट में एक अस्थायी शेल्टर होम में सोता यूक्रेनी बच्चा। यूक्रेन से भारी संख्या में रिफ्यूजी पड़ोसी देश रोमानिया पहुंच रहे हैं। फोटो- 13 मार्च।
पश्चिमी शहर लीव से बसों के जरिए यूक्रेनी नागरिक पड़ोसी देशों की बॉर्डर तक पहुंच रहे हैं। बस की खिड़की से बाहर देखता एक बच्चा। फोटो- मार्च 13।
पश्चिमी शहर लीव से बसों के जरिए यूक्रेनी नागरिक पड़ोसी देशों की बॉर्डर तक पहुंच रहे हैं। बस की खिड़की से बाहर देखता एक बच्चा। फोटो- मार्च 13।
लीव रेलवे स्टेशन की एक तस्वीर, जहां से लोग पोलैंड के लिए ट्रेन में सवार हो रहे हैं। पिता के साथ स्टेशन की सीढ़ियां चढ़ता एक बच्चा। फोटो- 15 मार्च।
लीव रेलवे स्टेशन की एक तस्वीर, जहां से लोग पोलैंड के लिए ट्रेन में सवार हो रहे हैं। पिता के साथ स्टेशन की सीढ़ियां चढ़ता एक बच्चा। फोटो- 15 मार्च।