भारतीय आई ड्रॉप्स से US में इन्फेक्शन फैलने का दावा:12 राज्यों में 55 लोग संक्रमित, एक मौत; कंपनी ने दवा वापस मंगवाई

कैलिफोर्निया2 महीने पहले
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आई ड्रॉप्स का नाम एजरीकेयर आर्टिफिशियल टियर्स है। इसे चेन्नई की दवा कंपनी बनाती है।

भारत की फार्मा कंपनी ने अमेरिकी बाजार से अपनी आई ड्रॉप्स की खेप वापस मंगवा ली है। पिछले दिनों अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने लोगों से इस दवा की खरीद और इस्तेमाल को फौरन बंद करने की अपील की थी। CDC का दावा है कि आई ड्रॉप्स से एक खास इन्फेक्शन फैल रहा है। इससे अब तक 55 लोग पीड़ित हुए हैं। एक व्यक्ति की मौत भी हुई है।

चेन्नई में बनी आई ड्रॉप्स की जांच जारी
आई ड्रॉप्स का नाम एजरीकेयर आर्टिफिशियल टियर्स है। इसे चेन्नई की दवा कंपनी ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर बनाती है। फिलहाल, CDC दवा की बंद बोतलों की जांच कर रही है। दूसरी तरफ, कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि आई ड्रॉप्स के सभी लॉट को एक्सपायर होने से पहले वापस मंगाया गया है।

आई ड्रॉप्स को आंखों में नमी बरकरार रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
आई ड्रॉप्स को आंखों में नमी बरकरार रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

दवा से अंधापन, मौत का खतरा
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एसोसिएशन (FDA) ने एक नोटिफिकेशन में कहा है कि इन आई ड्रॉप्स के किसी बैक्टीरिया से दूषित होने की आशंका है। लोगों को तुरंत इसके इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए। दूषित दवा के उपयोग से खतरनाक आई इन्फेक्शन हो सकते हैं, जिनसे आंखों की रोशनी से लेकर जान जाने तक का खतरा है।

12 राज्यों में 55 लोग हुए संक्रमित
CBS न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आई ड्रॉप्स के इस्तेमाल से अमेरिका के 12 राज्यों में स्यूडोमोनास एरुगिनोसा नाम के बैक्टीरिया का इन्फेक्शन फैल रहा है। यह बैक्टीरिया इंसान के खून, फेफड़ों और दूसरे अंगों को संक्रमित करता है। इससे अब तक 55 लोग संक्रमित हो चुके हैं, वहीं एक शख्स की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 11 लोगों ने अपनी आंखों की रोशनी गंवाई है।

स्यूडोमोनास एरुगिनोसा बैक्टीरिया एंटी-बायोटिक रेसिस्टेंट हो गया है। अब यह आसानी से नहीं मरता है।
स्यूडोमोनास एरुगिनोसा बैक्टीरिया एंटी-बायोटिक रेसिस्टेंट हो गया है। अब यह आसानी से नहीं मरता है।

बैक्टीरिया का इलाज करना बेहद मुश्किल
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो आज के समय में स्यूडोमोनास एरुगिनोसा के इन्फेक्शन को ठीक करना बेहद मुश्किल हो गया है। यह बैक्टीरिया पहले की तुलना में ज्यादा खतरनाक बन गया है। अब नॉर्मल दवाओं से भी इसका इलाज आसानी से नहीं हो पाता। यह बैक्टीरिया पानी और मिट्टी में भी फैल सकता है।

WHO ने 2 भारतीय दवाओं पर अलर्ट जारी किया
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO ने पिछले महीने दो भारतीय कफ सिरप के यूज को लेकर अलर्ट जारी किया है। दरअसल, उज्बेकिस्तान ने 22 दिसंबर को 19 बच्चों की मौत के लिए नोएडा की मैरियन बायाटेक में बनी AMBRONOL और Doc-1 Max कफ सिरप को जिम्मेदार बताया था। साथ ही WHO से इसकी जांच करने को कहा था।

गाम्बिया भी अपने यहां हुई 70 बच्चों की मौतों का जिम्मेदार भारत में बने 4 कफ सिरप को ठहरा चुका है। WHO ने भी इन कफ सिरप के इस्तेमाल पर अलर्ट जारी किया था। हालांकि भारत ने कहा था कि हमने कफ सिरप की जांच की थी। इनकी क्वालिटी सही पाई गई। इसके बाद गाम्बिया सरकार ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनके देश में हुई बच्चों की मौतों से भारतीय सिरप का कोई संबंध नहीं है।

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