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सेंट्रल एशिया से भारत तक कांपी धरती:जम्मू-कश्मीर में आज दूसरी बार भूकंप, यहां तीन दिन में चौथी बार झटके महसूस किए गए

श्रीनगर8 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को सुबह भी भूकंप के झटके आए, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.8 मापी गई थी
  • गुजरात के कच्छ में भी मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भूकंप, 3.5 तीव्रता के झटके महसूस किए गए

जम्मू कश्मीर में मंगलवार को 2 बजकर 10 मिनट पर दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.9 थी। इसका केंद्र कटरा जिले से 85 किमी दूर था। इससे पहले सुबह करीब सात बजे भी 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था। श्रीनगर, डोला और किश्वतवर जिलों में भी झटके महसूस किए गए। राज्य में तीन दिन में लगातार तीसरी बार भूकंप आया।

जानकारी के मुताबिक, सुबह में आए भूकंप का केंद्र ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे से 341 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व में बताया जा रहा है। इससे पहले जनवरी में ताजिकिस्तान में कारकेन्जा के पास 5.5 तीव्रता का भूकंप आया था।

मंगलवार को गुजरात में कच्छ में लगातार तीसरे दिन भूकंप के इटके आए। यहां भुज में सुबह 10.49 बजे 3.5 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। भूकंप का एपिसेंटर भचाऊ से 11 किलोमीटर दूर था। सोमवार और रविवार को भी यहां भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

सोमवार को गुजरात में भी झटके महसूस किए गए थे

सोमवार को गुजरात में राजकोट से 83 किलोमीटर दूर सोमवार को 12.57 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 थी। इसके कुछ घंटे बाद भुज में भी आफ्टर शॉक आए। इनकी तीव्रता 4.1 मापी गई। रविवार को भी गुजरात में झटके महसूस किए गए थे। रविवार से लेकर सोमवार तक गुजरात के अलग-अलग अलग इलाकों में 14 बार आफ्टर शॉक महसूस किए गए थे।

रविवार को आए भूकंप का सबसे ज्यादा असर भी कच्छ में ही देखा गया था। 26 जनवरी 2001 को भी कच्छ के भुज में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें 13 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

अब तक का सबसे तेज भूकंप चिली में आया

अब तक का सबसे बड़ा भूकंप चिली में  22 मई 1960 को रिकॉर्ड किया गया। यह 9.5 तीव्रता का भूकंप था। चिली के बाद दूसरा सबसे बड़ा भूकंप 28 मार्च 1964 में अमेरिका में रिकॉर्ड किया गया था। इसकी तीव्रता 9.2 थी।

6 या इससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है
भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप की असली वजह टेक्टोनिक प्लेटों में तेज हलचल होती है। इसके अलावा उल्का प्रभाव और ज्वालामुखी विस्फोट, माइन टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी भूकंप आते हैं। डॉ. अरुण ने बताया कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। इस स्केल पर 2.0 या 3.0 की तीव्रता का भूकंप हल्का होता है, जबकि 6 की तीव्रता का मतलब शक्तिशाली भूकंप होता है। 

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