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  • 85% Of People In Japan Want A Woman To Be Given A Gazette, But In Opposition To The Conservative Society, Including The Ruling Party; A 6 member Panel Set Up To Decide The Next Emperor

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शाही परिवार पर वारिस विहीन होने का संकट:जापान में 85% लोग चाहते हैं महिला को दिया जाए राजपाट, पर सत्तारुढ़ समेत रुढ़िवादी समाज विरोध में

एक महीने पहलेलेखक: टोक्यो से भास्कर के लिए जूलियन रायल
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जापान के 2600 साल पुराने शाही परिवार पर वारिस विहीन होने का संकट, यहां महिलाएं शासक नहीं बन सकती। - Dainik Bhaskar
जापान के 2600 साल पुराने शाही परिवार पर वारिस विहीन होने का संकट, यहां महिलाएं शासक नहीं बन सकती।

इन दिनों जापानी सरकार का छह सदस्यीय पैनल जापान का अगला ‘सम्राट’ तय करने के लिए चर्चा कर रही है। लेकिन लंबे समय से चले आ रहे इस सवाल के जवाब में कई कमेटियां बनीं, लेकिन सभी किसी एक नतीजे में पहुंचने पर नाकाम रही है। दरअसल अभी 61 साल के नारोहीतो सम्राट हैं और उनकी एक बेटी है प्रिंसेज आइको। लेकिन जापान के मौजूदा कानून के तहत महिलाओं को राजगद्दी नहीं मिलती है, इसलिए वो जापान की अगली वारिस नहीं हैं।

कुल मिलाकर जापानी शाही परिवार में 18 सदस्य हैं। इनमें से सिर्फ 7 ही 30 साल या इससे कम उम्र के हैं। ऐसे में ताज नारोहीतो के छोटे भाई के 14 वर्षीय बेटे हिसाहितो को मिल सकता है, यदि भविष्य में उन्हें बेटा नहीं होता है, तो 2600 साल से अधिक समय से चला आ रहा जापानी शाही परिवार वारिस विहीन हो सकता है। 1947 में यह नियम बनाया गया था कि कोई भी महिला जापान की शासक नहीं हो सकती है।

इससे पहले 1762-1771 के बीच साकुरामची महारानी रह चुकी हैं। फुकुई प्रीफेक्चुरल यूनिवर्सिटी में रुढ़िवादी एकेडमिक योइची शिमदा कहते हैं, ईमानदारी से कहूं तो यहां सिर्फ लकीर पीटी जा रही है। शाही परिवार के भविष्य के लिए पहले भी कई पैनल बने हैं। वे खूब बाते करते हैं। लेकिन इनमें किसी भी अच्छे तरीके के लिए कभी आम सहमति नहीं बनती है।

शिमदा इन दिनों उठ रही महिलाओं को गद्दी देने की आवाज के धुर विरोधी हैं। इसकी बजाय वे कहते हैं, शाही परिवार के उन दूर के रिश्तेदारों को खोजना चाहिए, जिन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अपनी शाही उपाधियां गंवा दी थीं। उन्हें फिर से शाही परिवार में जोड़ा जाए। इससे भविष्य में सम्राट चुनने के लिए कई योग्य पुरुष मिल जाएंगे। ऐसा ही एक प्रस्ताव सत्तारूढ़ एलडीपी पार्टी के सांसदों ने भी पेश किया है।

टेंपल यूनिवर्सिटी के टोक्यो कैम्पस में राजनीतिशास्त्र पढ़ाने वाली प्रोफेसर हिरोमी मुराकामी कहती हैं, वे समझ नहीं पा रही हैं कि रूढ़िवादियों और परंपरावादियों को महिला को राजपाट देने की बात इतनी क्यों चुभती है। इंपीरियल हाउस लॉ को महिला को गद्दी देने के लिए कानून में संशोधन करना चाहिए। देश में करवाए गए कई जनमत सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि आम जनता के 70 से 80 फीसदी लोगों ने उत्तराधिकार को लेकर नियमों को बदले जाने का समर्थन किया है।

85% महिला को सिंहासन पर देखना चाहते हैं। लेकिन परंपरावादी सत्ताधारी दल महिलाओं को गद्दी देने के पक्ष में नहीं है। हाल ही में प्रधानमंत्री सुगा ने इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, मौजूदा परिस्थितियों में पुरुषों को ही वरीयता दी जानी चाहिए।

जापानी शाही परिवार सिकुड़ रहा है, राजकुमारियों को वर नहीं मिल रहे

शाही परिवार में 18 सदस्य हैं। इनमें छह राजकुमारियों ने वर न मिलने की वजह से शादी नहीं है। यदि राजकुमारी आम लोगों से शादी करती हैं तो अपना शाही तमगा खो बैठती हैं। लेकिन पुरुषों पर नियम लागू नहीं होता है। दूसरी वजह यह है कि साल 1965 से 2006 तक जापान के राज परिवार में एक भी लड़के का जन्म नहीं हुआ। 2006 में राजकुमार हिसाहितो पैदा हुए। फिलहाल वे भावी सम्राट हैं।

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