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अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा:कोरोना फैलने से महीनेभर पहले वुहान लैब के 3 शोधकर्ताओं में लक्षण मिले थे, इलाज भी हुआ था

वॉशिंगटन8 महीने पहले
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कुटिल चीन ने बताया- वायरस का पहला केस दिसंबर 2019 में मिला, यह झूठ था। - Dainik Bhaskar
कुटिल चीन ने बताया- वायरस का पहला केस दिसंबर 2019 में मिला, यह झूठ था।

दुनिया जब ‘कोरोना’ से अनजान थी, उससे करीब एक महीने पहले चीन की वुहान लैब के तीन शोधकर्ता बीमार पड़ गए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था। एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पुख्ता प्रमाण के आधार पर यह खुलासा किया गया है। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के तीन शोधकर्ताओं को नवंबर 2019 में अस्पताल मे भर्ती कराया गया था।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक रिपोर्ट में बीमार शोधकर्ताओं की संख्या, बीमार पड़ने और अस्पताल जाने का समय और कोरोना जैसे लक्षण दिखने से जुड़ी विस्तृत जानकारियां हैं। जबकि चीन ने डब्लूएचओ को बताया था कि वुहान में कोरोना का पहला केस 8 दिसंबर 2019 को मिला था।

रिपोर्ट में इस बात पर सवाल उठाए गए हैं कि कोरोना वायरस पर काम करने वाली टीम के शोधकर्ता एक ही समय पर बीमार पड़े। यदि उन्हें सामान्य फ्लू, सर्दी और जुकाम था तो सीधे अस्पताल में भर्ती क्यों करवाया गया। इसके अलावा उन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया।

यह महत्वपूर्ण है कि एक ही जैसे लक्षण सभी में मिले। कोरोना कि उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी टास्क फोर्स के पूर्व अधिकारी डेविड अशर ने भी शक जताया था कि लैब के बेहद सुरक्षित वातावरण में तीन लोग बीमार पड़े और हफ्तेभर में गंभीर स्थिति में पहुंच गए। ये वाकया कोरोना के पहले ज्ञात क्लस्टर की ओर इशारा करता है।
76 हजार संक्रमित, 92 का डाटा बताया

डब्लूएचओ की जांच टीम के मुताबिक उन्होंने चीनी समकक्ष से कोरोना संक्रमित लोगों का डाटा मांगा था, तो 92 संभावित कोरोना केस की पहचान होने के बारे में बताया गया। जबकि वहां अक्टूबर से दिसंबर 2019 के दौरान करीब 76 हजार लोग संक्रमित थे। टीम ने दिसंबर 2019 से पहले एंटीबॉडी के टेस्ट सैंपल के लिए स्थानीय ब्लड बैंक का डाटा भी मांगा था। पहले तो निजता की चिंता जताई गई। बाद में वे तैयार तो हुए पर अभी तक टीम को डाटा नहीं दिया। स्पष्ट है, चीन बहुत कुछ छिपा रहा है।

सभी तथ्य साबित कर रहे कि वायरस चीन की लैब से ही निकला है

हाल में अमेरिका के 18 वैज्ञानिकों के समूह ने कोरोना की उत्पत्ति की गहराई से जांंच करने की मांग रखी है। इनका मानना है कि वायरस लैब से ही लीक हुआ है। ये सभी वैज्ञानिक सार्स परिवार के वायरस की गहन स्टडी करते रहे हैं। समूह का नेतृत्व कर रहे वायरोलॉजिस्ट जेसी ब्लूम के मुताबिक यह स्टडी डब्लूएचओ की टीम के पहुंचने तक चल रही थी। इसलिए टीम को लैब की जांच नहीं करने दी गई। जांच का दिखावा जरूर किया गया।

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