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ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी का शोध:एक माह के नवजात देख और सुनकर हास्य को समझने लगते हैं, चार माह का होने पर खुद हास्य बनाने लगतेे हैं

2 महीने पहले
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बच्चों के विकास के लिए समय दें। - Dainik Bhaskar
बच्चों के विकास के लिए समय दें।

एक माह का नवजात हास्य को देख और सुनकर समझने लगता है। चार महीने का नवजात तो खुद हास्य बनाने तक लग जाता है। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की ओर से चार देशों में 671 परिवारों में किए शोध में ये सामने आया है। इस शोध के नतीजे इसलिए भी अहम है, क्योंकि बच्चों के विकास के लिए शुरुआती चार साल बहुत अहम होते हैं। परिवार में जितना खुशनुमा माहौल होगा, अभिभावक जितना अिधक समय नवजात के साथ बिताएंगे, उतना बच्चे का मानसिक विकास बेहतर होगा।

शोध का नेतृत्व करने वालीं ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की डॉ. एलीना होइका का कहना है कि चार वर्ष तक का हाेने तक तो बच्चे लगभग 21 प्रकार के हास्य को समझने लगते हैं। एक माह का होने पर बच्चे अपने अभिभावकों खासकर मां की आवाज और उसकी उपस्थिति को भली-भांति पहचानने लगते हैं। माता या पिता द्वारा नवजात के साथ खेल के दौरान अजीब चेहरे बनाने, विभिन्न प्रकार की आवाजें निकालने, लुका छिपी और गुदगुदी को समझने लगते हैंं।

इसका मजा भी उठाने लगते हैं। साथ ही चार माह का होने तक तो बच्चे अपने तरीकों से खुद हास्य को बनाने भी लगते हैं। जैसे बच्चे अपने माता-पिता को देखकर खुश होने लगते हैं। इस दौरान बच्चे हास्य-विनोद के अपने तौर-तरीकों को भी ईजाद कर लेते हैं। शोध के अनुसार खुश रहने वाले बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास ज्यादा बेहतर तरीके से होता है।

नवजात सांस लेते और छोड़ते समय हंसने में सक्षम होते हैं

शोध में सामने आया कि बच्चे तीन से चार साल तक की उम्र के दौरान सांस लेते और छोड़ते दोनों समय हंसने में सक्षम होते हैं। ऐसा बंदर और चिम्पैंजी भी कर पाते हैं, क्योंकि उनमें भी वोकल ट्रैक्ट पर नियंत्रण की क्षमता नहीं होती है। बड़े होने पर मनुष्य सांस को छोड़ते समय ही हंसने में सक्षम हो जाता है।

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