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अंतरिक्ष में जसराज की चमक:पंडित जसराज के नाम पर सौरमंडल में रखा गया था क्षुद्र ग्रह का नाम, उनकी जन्मतिथि से एकदम उल्टा है उसका नंबर

8 महीने पहले
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श्री वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित भगवान कृष्ण की स्तुति मधुराष्टकम् को पंडित जसराज ने अपने स्वर से घर-घर तक पहुंचा दिया है। - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
श्री वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित भगवान कृष्ण की स्तुति मधुराष्टकम् को पंडित जसराज ने अपने स्वर से घर-घर तक पहुंचा दिया है। - फाइल फोटो
  • मंगल और बृहस्पति के बीच इस क्षुद्र ग्रह की खोज 11 नवंबर 2006 को हुई थी
  • इसके पहले मोजार्ट, बीथोवन और टेनर लूसियानो पावारोत्ति के नाम पर थे क्षुद्र ग्रह

मधुराष्टकम् को घर-घर तक पहुंचाने वाले शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का 90 साल की उम्र में अमेरिका में निधन हो गया। आज हमारे बीच पंडित जसराज सशरीर भले ही मौजूद ना हों, पर उनकी आवाज और उनका अस्तित्व हमेशा रहेगा। 13 साल पहले नासा ने एक क्षुद्र गृह का नाम ही पंडित जसराज के नाम पर रखा था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय कलाकार थे। खास बात ये थी कि इस क्षुद्र ग्रह का नंबर पंडित जसराज की जन्मतिथि से उलट रखा गया है।

बृहस्पति और मंगल के बीच परिक्रमा लगाते क्षुद्र ग्रह का नाम पंडित जसराज रखा गया।
बृहस्पति और मंगल के बीच परिक्रमा लगाते क्षुद्र ग्रह का नाम पंडित जसराज रखा गया।

नासा और इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन के वैज्ञानिकों ने बृहस्पति और मंगल के बीच 300128 नंबर का क्षुद्र ग्रह खोजा था और इसका नाम पंडित जसराज के नाम पर रखा। पंडित जसराज की जन्मतिथि 28/01/1930 है। इस क्षुद्र ग्रह के नंबर के उलट। नासा ने कहा था- पंडित जसराज छुद्र ग्रह हमारे सौरमण्डल में गुरु और मंगल के बीच रहते हुए सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।

8 दशक संगीत साधना को देने वाले पंडित जसराज ने क्षुद्र ग्रह के नामकरण पर कहा था- मुझे तो ईश्वर की असीम कृपा दिखती है। भारत और भारतीय संगीत के लिए ईश्वर का आशीर्वाद है।

माइनर प्लानेट है पंडित जसराज

माइनर प्लानेट वह ग्रह होते हैं जो न तो ग्रह हैं न ही इन्हें पूरी तरह से धूमकेतु कहा जा सकता है। बेटी दुर्गा ने बताया था कि पंडित जसराज क्षुद्र ग्रह के बारे में आईएयू ने 23 सितंबर 2019 को इस बात की घोषणा की थी और एक पत्र मुंबई स्थित घर पर पहुंचाया था।

जसरंगी जुगलबंदी रचा, मधुराष्टकम् प्रिय था
पंडित जसराज ने एक अनोखी जुगलबंदी की रचना की। इसमें महिला और पुरुष गायक अलग-अलग रागों में एक साथ गाते हैं। इस जुगलबंदी को जसरंगी नाम दिया गया।
श्री वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित भगवान कृष्ण की बहुत ही मधुर स्तुति है मधुराष्टकम्। पंडित जसराज ने इस स्तुति को अपने स्वर से घर-घर तक पहुंचा दिया। पंडित जी अपने हर एक कार्यक्रम में मधुराष्टकम् जरूर गाते थे। इस स्तुति के शब्द हैं -अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरं। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

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