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तैयार हो जाइए आपका अगला टेस्ट ‘AI टीचर’ लेंगे:सटीकता से मूल्यांकन कर ग्रेडिंग भी देंगे, गलतियों पर विस्तृत फीडबैक मिलेगा, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का ऑटोमेटेड सिस्टम छात्र की मामूली गलती भी पकड़ लेता है

3 दिन पहले
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स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का यह सिस्टम E एजुकेशन के नए भविष्य की ओर इशारा करता है, जो इतनी आसानी से हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। - Dainik Bhaskar
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का यह सिस्टम E एजुकेशन के नए भविष्य की ओर इशारा करता है, जो इतनी आसानी से हजारों लोगों तक पहुंच सकता है।

इस साल मार्च में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कोड इन प्लेस ऑनलाइन प्रोग्राम में 148 देशों के 1200 से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के फंडामेंटल से जुड़े इस कोर्स में स्वीडन के 23 वर्षीय फिलिप्स पाम भी शामिल थे। चार हफ्ते बाद पाम ने पहला टेस्ट दिया, इसमें उन्होंने ऐसा प्रोग्राम लिखा जिसमें ब्लैक एंड व्हाइट ग्रिड में ब्लू डायमंड की वेव थी। कुछ दिनों बाद उन्हें नतीजा मिला।

इसमें पाम के काम की तारीफ थी पर यह भी कहा गया कि उन्होंने छोटी सी गलती की है। वह यह कि तीसरी वेव खींचने के दौरान वे वॉल से टकरा रहे हैं। पाम को यह फीडबैक किसी टीचर ने नहीं बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) प्रोग्राम ने दिया था। पाम की तरह हजारों छात्रों को ऐसा ही फीडबैक मिला।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का यह सिस्टम E एजुकेशन के नए भविष्य की ओर इशारा करता है, जो इतनी आसानी से हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। AI रिसर्चर प्रो. चेल्सी फिन कहती हैं कि यह सिस्टम अपेक्षा से कहीं बेहतर काम कर रहा है। इस सिस्टम ने 1600 फीडबैक दिए, इनमें 97.9% पर छात्रों ने सहमति जताई। जबकि पिछले वर्षों में ह्यूमन इंस्ट्रक्टर के फीडबैक पर 96.7% सहमति थी। एक्सपर्ट कहते हैं महामारी के दौर में हमने देखा कि टेक्नोलॉजी से शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। AI इसे और उन्नत कर रही है।
हर विद्यार्थी के लिए अलग तरीका

टीचर क्लास में एक ही विषय 35 अलग तरीकों से नहीं पढ़ा सकते, पर AI से यह संभव है। AI हर छात्र के व्यवहार की स्टडी करता है। फिर इस जानकारी से विद्यार्थी के सीखने के अनुभव को पर्सनलाइज्ड बनाती है।

एडप्टिव लर्निंग: छात्र किसी बेसिक कॉन्सेप्ट में कमजोर है, तो AI इससे संबद्ध वीडियोज और रीडिंग मटेरियल बार-बार भेजता है ताकि वह कॉन्सेप्ट अच्छी तरह समझ सके।
ऑटोमेटेड ग्रेडिंग व फीडबैक: AI आंसर शीट्स की ग्रेडिंग में मदद कर सकती है, ताकि छात्रों को तुरंत फीडबैक मिल सके। इससे टीचर्स को रिसर्च करने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा।

छात्रों द्वारा बार-बार की जाने वाली गलतियों की पहचान में AI मददगार

स्टैनफोर्ड के इस ऑनलाइन प्रोग्राम की मॉनिटरिंग कर रहे प्रो. क्रिस पाइच बताते हैं कि यह AI​​​​​​​ सिस्टम अधिकतम छात्रों तक पहुंचने का तरीका है, जिन तक ह्यूमन इंस्ट्रक्टर नहीं पहुंच पाते। यह गलतियां बारीकी से पकड़ता है, उनकी समस्याएं बताता है। कोडिंग से जुड़ी विशिष्ट गलतियां और बार-बार की जाने वाली गलतियों को पहचान कर प्रशिक्षकों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता कर सकता है कि किन छात्रों को कैसी मदद की जरूरत है। यह टेक्नोलॉजी इसलिए प्रभावी रही क्योंकि इसकी भूमिका स्पष्ट रूप से तय की गई थी।

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