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अशरफ गनी का 32 साल पुराना आर्टिकल वायरल:रूस के अफगानिस्तान छोड़ने पर लिखा था- कठपुतली शासन खत्म हुआ, गनी के भागने पर लोग कह रहे- इतिहास खुद को दोहराता है

काबुल2 महीने पहले
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काबुल पर तालिबान का कब्जा होते ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी 15 अगस्त को देश छोड़कर भाग निकले। वे अपने साथ कैश से भरी एक कार भी ले गए। अशरफ गनी पहले ताजिकिस्तान गए। बताया जा रहा है कि वे अब अमेरिका रवाना होने वाले हैं। इस बीच गनी का लिखा हुआ 32 साल पुराना एक आर्टिकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गनी ने यह आर्टिकल 15 फरवरी 1989 में लिखा था। उस वक्त पूर्व सोवियत संघ (रूस) को अमेरिका और पाकिस्तान समर्थित मुजाहिदीनों से हारने के बाद अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा था। गनी तब अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में मानव शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर थे।

यह उस आर्टिकल की कटिंग है, जो अशरफ गनी ने 15 फरवरी 1989 लॉस एंजिल्स टाइम्स में लिखा था।
यह उस आर्टिकल की कटिंग है, जो अशरफ गनी ने 15 फरवरी 1989 लॉस एंजिल्स टाइम्स में लिखा था।

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गनी ने सोचा नहीं होगा, इस तरह भागना पड़ेगा
गनी के आर्टिकल की हेडिंग थी- सोवियत संघ ने अफगानिस्तान छोड़ दिया है, काबुल में अब कठपुतली शासन का पतन हो गया है। उस समय उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा कि कभी उन्हें भी यही स्थिति झेलनी पड़ेगी। गनी के आर्टिकल को अब लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर लिख रहे हैं कि इतिहास खुद को दोहराता है।

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अमेरिका की तराफी में गनी ने पढ़े थे कसीदे
उस वक्त जॉर्ज बुश अमेरिकी राष्ट्रपति थे। गनी ने आर्टिकल में लिखा था कि बुश प्रशासन ही अफगानिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना कर सकता है। यहां आर्थिक मजबूती के साथ स्वतंत्र रूप से चुनी गई सरकार का सत्ता में आना जरूरी है। उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों के बीच जनमत संग्रह कराने की भी मांग की थी।

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अमेरिका के पाकिस्तान की मदद करने पर ऐतराज जताया था
गनी ने अपने आर्टिकल में लिखा था कि ईरान और पाकिस्तान मिलकर अफगानिस्तान को युद्ध में झोंकने की कोशिश कर रहे हैं। इसे अमेरिका की मदद से ही खत्म किया जा सकता है। अफगानिस्तान के लोग यह नहीं चाहते कि अमेरिका उनकी राजनीति में दखलअंदाजी करे, लेकिन वे यह चाहते हैं कि अमेरिका यहां के लोगों को अपना नेता चुनने में मदद करे।

गनी ने यह भी कहा था कि अमेरिका को पाकिस्तान की मदद नहीं करना चाहिए। अमेरिका हर साल हथियारों की खेप और 2 बिलियन डॉलर की सहायता पाकिस्तान को देता रहा है।

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