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अफगानिस्तान की मुश्किलें और बढ़ेंगी:सूखे से जूझ रहे इस देश में संघर्ष और पलायन तेज होगा; तालिबान का ध्यान होर्डिंग्स से महिलाओं को हटाने पर ज्यादा

9 महीने पहलेलेखक: सोमिनी सेनगुप्ता

अफगानिस्तान में जलवायु संकट संघर्ष को और हवा दे सकता है। यहां के कुछ हिस्से वैश्विक औसत से दोगुना गर्म हैं। बारिश काफी कम है। कृषि के लिए उपयुक्त उत्तर और पश्चिम के इलाके 3 साल में दूसरी बार सूखे का सामना कर रहे हैं। काबुल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर नूर अहमद अखुंदजादा बताते हैं, ‘तीन-चौथाई आबादी कृषि पर निर्भर है और कोई भी अप्रत्याशित मौसम आपदा ला सकता है, खासकर ऐसे देश में जहां कोई स्थिर सरकार नहीं है।’ करीब एक तिहाई लोग खाद्य संकट से जूझ रहे हैं।

सूखे से गेहूं की 40% फसल तबाह, दाम 25% तक बढ़ गए
इस युद्ध की वजह से, कई लोग फसल नहीं बो सके हैं। सूखे की वजह से फसल खराब होना तय है। विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि 40% फसल तबाह हो गई है और गेहूं की कीमत 25% बढ़ गई है। दुनिया के 25 देशों में सबसे अधिक जलवायु परिवर्तन की चपेट में वे देश हैं, जहां संघर्ष और अशांति है।

गर्मी और सूखे की वजह से अफगानिस्तान बच्चों के लिए दुनिया का 15 वां सबसे जोखिम भरा देश है। यहां 20 लाख बच्चे कुपोषित हैं। फिलहाल तालिबान समस्याओं को खत्म करने की जगह होर्डिंग से महिलाओं को हटाने पर ज्यादा सक्रिय है। विश्लेषकों का कहना है कि जल प्रबंधन अफगान नागरिकों के साथ तालिबान की वैधता के लिए अहम होगा। यहां पानी हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है। तालिबान हेरात शहर के बांध पर बार-बार हमला करता रहा हैै। 2018 के सूखे में 3.71 लाख अफगानियों को घर छोड़ना पड़ा था।

अफगान अपने धन को सुरक्षित रखने के लिए क्रिप्टोकरंसी में निवेश कर रहे
अफगानिस्तान में बैंकिंग सिस्टम ध्वस्त है। इस आर्थिक संकट के बीच कुछ अफगान क्रिप्टोकरंसी में निवेश कर रहे हैं। इसमें इस बात की गारंटी है कि उनका धन सुरक्षित रहेगा। अफगानिस्तान में तेजी से इसका चलन बढ़ा हैै। 2021 ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स में 154 देशों में अफगानिस्तान 20वीं सूची पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के पीयर-टू-पीयर एक्सचेंज ट्रेड वॉल्यूम को अलग करने पर अफगानिस्तान 7वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि, यह डेटा नहीं है कि कुल आबादी के कितने लोगों ने क्रिप्टोकरंसी में निवेश किया है।

अमेरिका समेत पूरी दुनिया तालिबान को सरकार चलाने में मदद करे: चीन
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपने समकक्ष अमेरिकी मंत्री एंटनी ब्लिंकन से कहा है कि अफगानिस्तान में बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि दुनिया के सभी देश तालिबान के साथ संपर्क स्थापित करें। उन्होंने तालिबान का सक्रिय मार्गदर्शन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। ताकि नए राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक ढांचे को स्थिरता दी जा सके। वांग ने कहा कि तथ्य बताते हैं कि युद्ध के जरिए कभी भी अफगानिस्तान में आतंकवादी ताकतों को खत्म करने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है।

तालिबान अफीम की खेती से चीन-कतर जैसी विदेशी शक्तियों से संबंध मजबूत करेगा
यह सूखा अफीम-पोस्ता की खेती बंद करने के तालिबानी वादे को कठिन बनाता है। इसमें गेहूं, खरबूजे की तुलना में कम पानी लगता है और यह कहीं ज्यादा फायदेमंद हैं। इस खेती से सालाना करीब 2928 करोड़ रुपए आते हैं, जिसने तालिबान को समृद्ध किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान कतर और चीन जैसी विदेशी शक्तियों से वैधता हासिल करने के लिए अफीम और पोस्ता का इस्तेमाल करना चाहता है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की वांडा फेलबाब-ब्राउन कहती हैं कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है।

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