काबुल के कोचिंग सेंटर में ब्लास्ट:फिदायीन हमले में 19 स्टूडेंट्स की मौत, तालिबान ने मीडिया कवरेज पर रोक लगाई

काबुल2 महीने पहले
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक एजुकेशन इंस्टीट्यूट में शुक्रवार को धमाका हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 19 बताई गई है। अफगानिस्तान के एक जर्नलिस्ट बिलाल सरवरी ने 100 स्टूडेंट्स की मौत का दावा किया है। सरवरी के मुताबिक, तालिबान ने हॉस्पिटल के मालिक को धमकी दी है कि वो कोई भी जानकारी मीडिया को लीक न करे।

सरवरी ने काबुल के एक प्राइवेट हॉस्पिटल से बातचीत की। हॉस्पिटल के मालिक ने उनसे कहा- हमें तालिबान ने सख्त हिदायत दी है कि किसी भी तरह की जानकारी बाहर नहीं जानी चाहिए। मीडिया को सिक्योरिटी या हमलों की जानकारी बिल्कुल न दें। हॉस्पिटल में कोई भी कैमरा या जर्नलिस्ट अंदर नहीं आना चाहिए।

बिलाल ने सोशल मीडिया पर लिखा- यह हमला अफगानिस्तान में पहले से ही हाशिए पर चल रहे हजारा और शिया कम्युनिटी पर हुआ है। ISKP (इस्लामिक स्टेट खोरासान ग्रुप) इनको निशाना बना रहा है। यह हमला काज हायर एजुकेशन सेंटर पर हुआ है। यहां के एक अफसर ने मुझे बताया कि अब तक वो 100 स्टूडेंट्स के शव निकाल चुके हैं। आज यहां यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए मॉक टेस्ट होने वाला था। इसलिए स्टूडेंट्स की तादाद काफी ज्यादा थी। एक स्टूडेंट ने AFP न्यूज को बताया कि वहां करीब 600 स्टूडेंट्स थे, जिनमें ज्यादातर लड़कियां थीं।

घायलों का इलाज जारी
काबुल पुलिस के स्पोक्सपर्सन खालिद जादरान ने कहा- हमला अफगान के नॉर्थ रीजन के एजुकेशन इंस्टीट्यूट में हुआ। यह फिदायीन हमला था। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यहां ज्यादा आबादी हजारा (शिया मुस्लिमों की जाति) मुस्लिमों की है। ये समूह पिछले कुछ महीनों से लगातार आतंकियों के निशाने पर है।

हमले में घायल हुए लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की तलाश में लोकल हॉस्पिटल के बाहर पहुंचे। अस्पताल के बाहर सुरक्षाकर्मियों को कड़ा पहरा है।
हमले में घायल हुए लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की तलाश में लोकल हॉस्पिटल के बाहर पहुंचे। अस्पताल के बाहर सुरक्षाकर्मियों को कड़ा पहरा है।

टेबल्स और चेयर के नीचे फंसे हुए थे शव
एक अन्य व्यक्ति ने कहा- मैं और मेरा दोस्त घर पर थे। तभी जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी। हम बाहर आए तो देखा घर के पास वाले एजुकेशन इंस्टीट्यूट से धुआं उठ रहा था। हम वहां गए। हमारे सामने पुलिस ने 15 घायलों और 9 शवों को बाहर निकाला। इनमें से कई शव क्लास के अंदर कुर्सियों और टेबल्स के नीचे पड़े थे।

धमाके के बाद स्टूडेंट्स के शवों को क्लास रूम के टेबल और चेयर्स के नीचे से निकाला गया।
धमाके के बाद स्टूडेंट्स के शवों को क्लास रूम के टेबल और चेयर्स के नीचे से निकाला गया।

स्टूडेंट्स पर हुए बड़े हमलो में से एक

तालिबान के राज में ये आत्मघाती हमला बच्चों पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक है। इससे पहले 2014 में पाकिस्तान के पेशावर शहर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर तालिबान आतंकियों ने हमला किया था। 132 बच्चों सहित 141 लोगों की मौत हो गई थी। हमले के वक्त स्कूल में स्टाफ सहित कुल 1100 लोग थे।

आतंकियों ने सेना से बचने के लिए बच्चों को बंधक बनाने के बाद उन्हें मानव ढाल बनाकर स्कूल में एंट्री की थी। आर्मी की जवाबी कार्रवाई के दौरान छह आतंकियों ने खुद को बम से उड़ा लिया था। तीन सेना की गोली से मारे गए थे।

साल 2014 में तालिबानी आतंकियों ने पाक के आर्मी पब्लिक में 132 बच्चों पर गोलियां चलाई थी। इस हमले में 141 लोगों की मौत हुई थी।
साल 2014 में तालिबानी आतंकियों ने पाक के आर्मी पब्लिक में 132 बच्चों पर गोलियां चलाई थी। इस हमले में 141 लोगों की मौत हुई थी।

तालिबान का दावा फेल, अपने लोगों को नहीं दे पा सुरक्षा
तालिबान अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। उसका दावा है कि वो अफगानिस्तान और उसके लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। लेकिन, हाल के कुछ महीनों में अफगान की मस्जिदों और आबादी वाले क्षेत्रों को आतंकवादी संगठन लगातार निशाना बना रहें हैं।

2 सितंबर को हुआ था मस्जिद में धमाका

2 सितंबर को शिया मुस्लिमों की मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले में 14 लोगों की मौत हो गई थी। 200 से ज्यादा बुरी तरह से घायल हुए थे।
2 सितंबर को शिया मुस्लिमों की मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले में 14 लोगों की मौत हो गई थी। 200 से ज्यादा बुरी तरह से घायल हुए थे।

इस महीने में ये तीसरा बड़ा हमला है। इससे पहले 2 सितंबर को एक आफगानिस्तान के हेरात प्रांत की गुजरगाह मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद बम विस्फोट से 14 लोगों की मौत हो गई थी। 200 लोग बुरी तरह से घायल हुए थे। धमाके में मस्जिद के इमाम मौलवी मुजीब रहमान अंसारी की मौत भी हो गई थी। अंसारी तालिबान से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में से एक थे। मौलवी मुजीब रहमान अंसारी को तालिबान का करीबी और एक कट्टरपंथी मौलवी माना जाता था। हेरात के गर्वनर ने अपने इस बयान में इसे भी आत्मघाती हमला बताया था।

6 सितंबर को रूसी एम्बेसी के बाहर हुआ था हमला

6 सितंबर को काबुल में रूसी एम्बेसी के बाहर हुए फिदायीन हमले में 20 लोगों की मौत हो गई थी।
6 सितंबर को काबुल में रूसी एम्बेसी के बाहर हुए फिदायीन हमले में 20 लोगों की मौत हो गई थी।

6 सितंबर को काबुल के दारुल अमन इलाके में रूसी एम्बेसी के बाहर फिदायीन हमले में 2 रूसी अधिकारियों समेत 20 लोगों की मौत हो गई थी। ये भी एक आत्मघाती हमला था। धमाके के दौरान कुछ अफगानी नागरिक वीजा बनवाने के लिए रूसी ऐंबेसी के बाहर पहुंचे थे। एम्बेसी में तैनात गार्ड ने बताया था एक संदिग्ध पर फायरिंग के तुरंत बाद उसने खुद को उड़ा दिया। पढ़िए पूरी खबर...

17 अगस्त को मस्जिद में किया गया था धमाका

काबुल की मस्जिद में हुए धमाके में मौलवी आमिर मोहम्मद सहित 20 लोगों की मौत हो गई थी।
काबुल की मस्जिद में हुए धमाके में मौलवी आमिर मोहम्मद सहित 20 लोगों की मौत हो गई थी।

राजधानी काबुल 17 अगस्त को एक मस्जिद में धमाका हुआ था। जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई। 40 लोग घायल हुए थे। हमला काबुल के खैरखाना इलाके में 'अबूबकिर सेदिक' मस्जिद में मगरिब की नमाज के दौरान हुआ था। ब्लास्ट में मस्जिद के मौलवी आमिर मोहम्मद काबुली की भी मौत हुई है। घायलों में 5 बच्चे भी शामिल थे। पढ़िए पूरी खबर...

22 मई को चार धमाकों में 20 लोगों ने गंवाई जान

22 मई को हुए धमाके में से एक धमाका शिया मुस्लिमों की मस्जिद में किया गया था। इसमें, पांच लोगों की मौत हो गई थी।
22 मई को हुए धमाके में से एक धमाका शिया मुस्लिमों की मस्जिद में किया गया था। इसमें, पांच लोगों की मौत हो गई थी।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 22 मई 2022 की शाम एक बाद एक चार धमाके हुए थे। इन धमाकों में 16 लोगों की मौत हो गई थी। 22 से ज्यादा घायल हुए थे। चार धमाकों में से एक धमाका शिया मुस्लिमों की मस्जिद अन्य तीन धमाके उत्तरी शहर मजार-ए-शरीफ में यात्री वैन में हुए थे। मस्जिद में हुए विस्फोट में पांच लोगों की मौत हो गई। पढ़िए पूरी खबर...