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अफगानिस्तान / राष्ट्रपति चुनाव आज; भारत सबसे बड़ा सहयोगी, लेकिन आंतरिक मामलों में कभी दखल नहीं



Afghanistan Presidential Election 2019 Latest News Update: Elections in Afghanistan - Everything you need to know
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Afghanistan Presidential Election 2019 Latest News Update: Elections in Afghanistan - Everything you need to know

  • 2001 में अफगानिस्तान में तालिबान के खात्मे के बाद ये चौथे आम चुनाव हैं
  • अक्टूबर 2018 में तालिबान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता शुरू हुई थी, अगस्त तक 9 चरण हुए, दोनों पक्षों ने कहा- जल्द नतीजा आएगा

Dainik Bhaskar

Sep 28, 2019, 10:38 AM IST

काबुल. अफगानिस्तान में आज राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। 2001 में तालिबान के खात्मे के बाद देश के चौथे आम चुनाव हैं। तालिबान ने पहले ही पोलिंग स्टेशन को निशाना बनाने की धमकी दी है। हालांकि अमेरिका की अगुआई में सुरक्षाबलों ने बीते हफ्तों में कई जमीनी और हवाई हमलों को नाकाम किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों में पिछले हफ्ते 150 लोग मारे गए थे।   

 

अफगानिस्तान की आबादी करीब 3 करोड़ 50 लाख, इस बार 96 लाख लोग वोट डालेंगे। 72 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए, जिनमें 9900 महिलाएं हैं। 33 राज्यों में 5373 पोलिंग केंद्र बनाए गए, 1.10 लाख चुनावकर्मी वोटिंग करवाएंगे। भारत को अफगानिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी माना जाता है, लेकिन हमने कभी भी उनके आंतरिक मसले में हस्तक्षेप नहीं किया।

 

इस बार शांति वार्ता चर्चा में
अक्टूबर 2018 में तालिबान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता शुरू हुई थी। इसके चार बिंदु मुख्य थे- 1- इस बात की गारंटी देनी होगी कि विदेशी हथियारबंद गुट और लड़ाकों को अफगानिस्तान से दूसरे देशों में हमला करने की अनुमति नहीं होगी। 2- अफगानिस्तान से अमेरिका और नाटो फौजें वापस जाएंगी। 3- अफगानिस्तान के अंदरूनी गुटों में बातचीत होगी। 4- स्थायी युद्धविराम होगा। इस अगस्त तक बातचीत के चार चरण हो चुके हैं। दोनों पक्षों का कहना है कि जल्द समझौता हो जाएगा।

 

इस बीच सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांति वार्ता को मृत करार दे दिया था। इसकी वजह उन्होंने काबुल हमले के पीछे तालिबान का हाथ बताया था। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि वे गुप्त रूप से अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और तालिबान से कैंप डेविड स्थित प्रेसिडेंशियल रिट्रीट में बात करेंगे।

 

कौन-कौन हैं मैदान में
अफगानिस्तान के चुनाव में 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। नेशनल असेंबली या वोलेसी जिरगा (निचला सदन) की 249 सीटों और मेशरानो जिरगा (उच्च सदन) की 102 सीटों पर मतदान होगा। असल ताकत वोलेसी जिरगा में है। यहीं कानून बनाए जाते हैं और उनमें संशोधन होता है। मेशरानो जिरगा सलाहकार की भूमिका में होती है। इस चुनाव में 6 प्रमुख चेहरे हैं।

 

1. अशरफ गनी: दूसरी बार राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। खुद को दौलत साज यानी देश निर्माता बता रहे हैं।  

 

2. अब्दुल्ला अब्दुल्ला: फिलहाल अफगानिस्तान के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर हैं। यह पद 2014 के चुनवा के बाद ही बनाया गया था। अब्दुल्ला की गनी से सीधी टक्कर है। अब्दुल्ला के प्रचार का मोटो स्थायित्व और एकीकरण रहा।

 

3. अहमद वली मसूद: रूस-तालिबान विरोधी कमांडर रहे अहमद शाह मसूद के छोटे भाई हैं। ताजिक समुदाय से आते हैं और यूके में अफगानिस्तान के राजदूत रह चुके हैं।

 

4. गुलबुद्दीन हिकमतयार: पूर्व कमांडर रहे युद्ध अपराधों के आरोपी थे। हिकमतयार पर 1990 के दशक में अफगान सिविल वॉर के दौरान हजारों नागरिकों को मरवाने के आरोप लगे थे। 2016 के शांति समझौते के तहत हिकमतयार को माफी दे दी गई। दो दशकों तक बाहर रहने के बाद हिकमतयार मई 2017 में देश लौटे।

 

5. अब्दुल लतीफ पेदराम: ताजिक समुदाय से आते हैं। वर्तमान में सांसद हैं। महिलाओं के अधिकार और संघीय ढांचे की आवाज बुलंद करते रहे हैं।

 

6. रहमतुल्ला नबील: दो बार अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसी के प्रमुख रहे। तालिबान और अशरफ गनी के मुखर आलोचक हैं।

 

भारत की भूमिका
अफगानिस्तान के 31 प्रांतों में भारत की 116 परियोजनाएं चल रही हैं और उनकी लागत दो अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2015 में अफगानिस्तान की संसद का उद्धाटन किया था। जिस अफ़ग़ान संसद का उद्घाटन उन्होंने किया था, वो भारतीय मदद से बना था और इस भवन के एक ब्लॉक का नाम भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर है।

 

भारत ने ईरान में चाबहार पोर्ट में निवेश किया है। पोर्ट को ईरान-अफगानिस्तान के अलावा मध्य एशिया में व्यापार के लिए एक द्वार की तरह देखा जा रहा है। इससे भारत, ईरान और अफगानिस्तान को आपसी व्यापार के लिए पाक की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। समझौते के मुताबिक, चाबहार पोर्ट के पहले चरण के लिए भारत 85.21 मिलियन डॉलर (610 करोड़ रु.) का निवेश करेगा। 10 साल की लीज पर भारत को 22.95 मिलियन डॉलर (165 करोड़ रु.) राजस्व मिलेगा।

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