'तालिबानी हमें मार देंगे':उज्बेकिस्तान के रिफ्यूजी कैंप में रुके अफगानी पायलट की डायरी; अपने घर लौटने की हिम्मत नहीं, अमेरिकी रेस्क्यू विमान का इंतजार

काबुल2 महीने पहले
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यह डायरी ऐसे एक अफगानी पायलट की है जो अपने साथियों और अन्य शरणार्थियों के साथ करीब तीन हफ्ते से उज्बेकिस्तान के कैंप में शरण लिए हुए है। ये लोग अमेरिकी रेस्क्यू विमान के आने का इंतजार कर रहे हैं। इस अफगानी पायलट ने कहना है कि अगर हम लौट कर अफगानिस्तान गए तो तालिबान हमें मार डालेगा।

ये अफगानी पायलट अपने घर लौटने से डर रहे हैं। तालिबान में अब अफगानिस्तान की हुकूमत है और ये पायलट्स अफगानी सेना में थे। जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया तो, ये पायलट्स अपने एयरक्राफ्ट्स उड़ाकर अफगानिस्तान के उत्तरी बॉर्डर के पार उज्बेकिस्तान ले गए थे।

उज्बेकिस्तान में बने शरणार्थी कैंप की सैटेलाइट तस्वीर।
उज्बेकिस्तान में बने शरणार्थी कैंप की सैटेलाइट तस्वीर।

डर से साए में कट रहा वक्त
इस पायलट ने रॉयटर्स से फोन पर बात करते हुए बताया कि उज्बेकिस्तान में शरणार्थी कैंप में एक उज्बेकी गार्ड ने उनपर और उनके साथियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तुम यहां हमेशा नहीं रह सकते। यह सुनकर उनका सबसे बुरा डर उनकी आंखों के सामने आ गया। उज्बेक गार्ड की इस चेतावनी ने पहले से सहमे हुए अफगानी पायलट्स और अन्य शरणार्थियों का डर और बढ़ा दिया।

आजादी को तरस रहे अफगानी शरणार्थी
इस पायलट ने कहा, "अगर हमें वापस अफगानिस्तान भेजा गया तो मुझे 100% भरोसा है कि तालिबानी हमें मार डालेंगे।"

उन्होंने बताया कि उन्हें किसी कैदी जैसा महसूस होता है, जो अपनी मर्जी से कहीं आ-जा नहीं सकता। जिसे धूप में कई घंटे बिताने पड़ते हैं और न तो भोजन मिल पाता है और न दवाइयां।

"हम लोगों में से कई का वजन बहुत घट गया है। यहां हमें कोई आजादी नहीं है।"

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