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काबुल के गुरुद्वारे में घुसे तालिबानी:आतंकियों ने सिखों से बदसलूकी की, CCTV कैमरे तोड़े; कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर

काबुल2 महीने पहले

करीब दो महीने पहले अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले तालिबान अब दूसरे मजहब के धर्मस्थलों को भी निशाना बनाने लगे हैं। मंगलवार को तालिबानियों का एक दल काबुल के पवित्र कर्ते परवान गुरुद्वारे में घुसा। यहां मौजूद सिखों से काफी देर तक सवाल-जवाब किए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों से बदसलूकी भी की गई। बाद में वहां मौजूद CCTV कैमरों को तोड़ दिया गया। कर्ते परवान गुरुद्वारे के प्रमुख भाई गुरनाम सिंह ने खुद इसकी जानकारी दी।

इंडिया वर्ल्ड फोरम के चेयरमैन पुनीत सिंह चंडोक ने भी कर्ते परवान गुरुद्वारे में तालिबानियों के घुसने की पुष्टि की है।

हथियारबंद थे तालिबानी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मंगलवार शाम करीब 4 बजे की है। गुरुद्वारे में कई सिख मौजूद थे। इनमें से कुछ यहां स्थायी रूप से रहते हैं और कुछ हाल ही में यहां हिंसा से बचने के लिए शरणार्थी के तौर पर आए हैं। दोपहर तक यहां हालात सामान्य थे। करीब चार बजे कुछ तालिबानी यहां घुसे। कुछ हथियारबंद थे, जबकि कुछ खाली हाथ थे। इन लोगों ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली।

कुछ हिरासत में
तालिबानियों ने गुरुद्वारे के मुख्य हाल में मौजूद लोगों से काफी देर तक सवाल-जवाब किए। इस दौरान गुरुद्वारे के स्टाफ ने तालिबान के हर सवाल का विस्तार से जवाब दिया। हालांकि, तालिबानियों का लहजा बेहद खराब था।

सोशल मीडिया पर जारी कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तालिबानी दस्ते ने गुरुद्वारे के कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। बताया जाता है कि तालिबान की इंटेलिजेंस एजेंसी के लोगों ने इस पवित्र स्थल की तलाशी भी ली।

CCTV क्यों तोड़े?
गुरुद्वारे के प्रमुख गुरनाम सिंह ने बताया कि तालिबानियों ने वहां लगे करीब-करीब हर CCTV कैमरे को तोड़ दिया। माना जा रहा है कि इसका मकसद यह था कि आतंकियों की हरकत कैमरों में रिकॉर्ड न होने पाए। सोशल मीडिया पर जारी कुछ वीडियोज में टूटे हुए CCTV और उखड़े हुए तार देखे जा सकते हैं।

यहां लोगों की जान बची थी
तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा किया था। इसके बाद सिख और हिंदू अल्पसंख्यकों ने इस गुरुद्वारे में पनाह लेकर जान बचाई थी। बाद में कुछ को भारत आने दिया गया।
तालिबान ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया को यह भरोसा दिलाया था कि वो हर कीमत पर दूसरे मजहबों के धर्मस्थलों की रक्षा करेंगे और गैर मुस्लिमों को परेशान नहीं किया जाएगा।