तालिबान से समझौता:अफगान सरकार ने सत्ता में साझेदारी का ऑफर दिया; काबुल पर कब्जे से केवल 150 किमी. दूर तालिबान

काबुल5 महीने पहले

तालिबानी लड़ाके एक हफ्ते में अफगानिस्तान के 11 राज्यों पर कब्जा कर चुके हैं। अब उनका गजनी और हेरात पर भी कब्जा है, जो राजधानी काबुल से महज 150 किमी. दूर है। यानी तालिबानी जल्द ही काबुल पर भी कब्जा कर सकते हैं और इसके बाद पूरा अफगानिस्तान उनकी गिरफ्त में होगा। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, तालिबान ने वेस्ट अफगानिस्तान के हेरात में पुलिस हेड क्वार्टर पर भी कब्जा कर लिया है।

इस बीच, अफगानिस्तान सरकार ने सुलह की कोशिश की है। कतर में तालिबानियों के साथ बातचीत कर रहे सरकारी अधिकारियों ने हिंसा खत्म करने के लिए समझौते का एक ऑफर दिया है। AFP के मुताबिक, अफगान सरकार तालिबानियों को सत्ता में साझेदार बनाना चाहती है ताकि वो देश में जंग खत्म कर दें। इस बारे में भास्कर ने तालिबान का पक्ष जानने के लिए उसके प्रवक्ता से बात की। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव में कुछ भी नया नहीं है।

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गजनी शहर पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने हर चौराहे पर अपने लड़ाके तैनात कर दिए हैं।
गजनी शहर पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने हर चौराहे पर अपने लड़ाके तैनात कर दिए हैं।

काबुल पर कब्जे में लग सकते हैं 3 महीने
गुरुवार को तालिबान ने अफगानिस्तान के 10वें राज्य की राजधानी गजनी पर कब्जा कर लिया। यहां कल तक जो गवर्नर ऑफिस, पुलिस हेडक्वार्टर और जेल सरकार के नियंत्रण में थी, अब उन पर तालिबान के आतंकियों का कब्जा है। गजनी और काबुल की दूरी महज 150 किलोमीटर है।

अफगानिस्तान के उन आम लोगों की उम्मीद दिन-ब-दिन टूटती जा रही है, जो अलग-अलग शहरों से काबुल इस आस में पहुंचे थे कि कम से कम राजधानी तो तालिबान के कब्जे से बची रहेगी। अमेरिका सहित कई देशों के डिफेंस एक्सपर्ट मानकर चल रहे थे कि तालिबान को काबुल कब्जाने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है, लेकिन उनके दावे गलत साबित होते नजर आ रहे हैं।

गजनी राज्य परिषद के प्रमुख नसीर अहमद फकीरी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि गजनी प्रोविंस के कुछ शहरों में तालिबान और अफगान सेना के बीच झड़प जारी है, लेकिन ज्यादातर हिस्सा आतंकियों की गिरफ्त में आ चुका है। तालिबान भी गजनी पर कब्जे का ऐलान कर चुका है।

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जिस शहर में भी तालिबान के आतंकी कब्जा करते हैं, वहां से महिलाएं और बच्चे पलायन करने लगते हैं।
जिस शहर में भी तालिबान के आतंकी कब्जा करते हैं, वहां से महिलाएं और बच्चे पलायन करने लगते हैं।

तालिबानी कब्जे के 7 दिन

1. जरांज: यह अफगानिस्तान के किसी राज्य की पहली राजधानी थी, जिस पर तालिबान कब्जा जमाने में कामयाब हुआ था। 6 अगस्त को आतंकियों ने यह शहर कब्जाया था।
2. शबरगान: तालिबान के हाथ आने वाली यह अफगानिस्तान के राज्य की दूसरी राजधानी थी। जरांज कब्जाने के 24 घंटे के अंदर ही 7 अगस्त को शबरगान तालिबान के कब्जे में आ गया था।
3. सर-ए-पोल: तालिबान ने 8 अगस्त को इस शहर पर कब्जा किया था। इस राज्य में 7 जिले और 896 गांव हैं।
4. कुंदुज: यह उत्तरी अफगानिस्तान के कुंदुज राज्य की राजधानी है। इसकी आबादी 4 लाख के करीब है। तालिबान ने 8 अगस्त को यहां कब्जा किया।
5. तालेकान: कुंदुज के साथ 8 अगस्त को तालिबान ने तालेकान भी कब्जाया था। यह तखार प्रोविंस की राजधानी है। इसकी आबादी 2006 में 2 लाख के करीब थी।
6. ऐबक: तालिबान के कब्जे में आने वाली यह अफगानिस्तान के राज्य की छठवीं राजधानी थी। यहां 9 अगस्त को आतंकियों ने कब्जा किया था।
7. फराह: यह पश्चिमी अफगानिस्तान का सबसे बड़ा शहर है। इसका बॉर्डर ईरान के साथ मिलता है। 10 अगस्त को तालिबान ने इस पर कब्जा किया था।
8. पुल-ए-खुमरी: यह शहर बघलान प्रोविंस की राजधानी है। यह कुंदुज से 100 किलोमीटर और मजार-ए-शरीफ से 200 किलोमीटर दूर है। 10 अगस्त को तालिबान ने इस पर कब्जा किया था।
9. फैजाबाद: अफगानिस्तान के पामेर रीजन का कॉमर्शियल हब है। यह बदख्शन प्रोविंस की राजधानी है। इसे तालिबान ने 11 अगस्त को कब्जाया था।
10. गजनी: काबुल से कंधार जाने का रास्ता इस शहर से ही होकर गुजरता है। आबादी करीब 2 लाख है। 12 अगस्त को तालिबान ने इस पर भी कब्जा कर लिया।

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