तालिबान नहीं मानेगा UN की सलाह:कहा- हम इस्लामिक सरकार, यहां महिलाओं को पर्दे में ही रहना होगा

काबुल8 महीने पहले
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अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद महिलाओं की जीवन 20 साल पहले जैसा हो गया है। यहां महिलाओं को दबाया जा रहा है। उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। महिलाओं की ये स्थिति दुनिया से छिपी नहीं हैं। इसको लेकर UNSC ने चिंता जाहिर करते हुए तालिबान सरकार को सलाह दी थी, जिसे शुक्रवार को तालिबान ने नकार दिया है।

तालिबान सरकार में महिलाओं की हालत दुनिया से छिपी नहीं है। 15 अगस्त 2021 को सत्ता में वापसी के बाद तालिबानियों ने महिला अधिकारों बरकरार रखने का वादा किया था, लेकिन उनके फरमानों से तालिबानियों की कथनी और करनी में फर्क साफ नजर आता है।

दरअसल, सिक्योरिटी काउंसिल ने तालिबान की महिला अधिकार विरोधी नीतियों पर चिंता जताई थी। उन्होंने तालिबान को अपने देश में महिलाओं के मानवीय अधिकारों का हनन न करने की सलाह दी थी।

हिजाब समाज के लिए जरूरी

तालिबान ने UN की इस सलाह को सिरे से नकार दिया है। तालिबानी प्रवक्ता अब्दुल कहर बर्ल्ख ने इस सलाह को नकारते हुए कहा- अफगानिस्तान मुस्लिम आबादी का देश है। इसलिए हमारी सरकार महिलाओं के पर्दे और हिजाब को समाज और संस्कृति के लिए जरूरी मानती है।

महिलाओं पर लगाए कई बैन

पिछले साल अगस्त में तालिबान ने काबुल पर कब्जा करने के बाद महिलाओं के ज्यादातर अधिकार सीमित कर दिए हैं। तालिबान ने काबुल के अलावा अधिकतर महिला स्कूल और कॉलेजों को खोला नहीं है। अगर कहीं प्राथमिक स्कूलों को खोला भी गया है, कई तरह के प्रतिबंध लगाकर उन्हें स्कूल जाने की इजाजत दे रही है।

तालिबान ने कंधार समेत कई प्रांतो में स्कूल खोलने की बात सामने आई थी, लेकिन कुछ घंटो बाद ही इन्हें बंद रखने का आदेश जारी कर दिया था
तालिबान ने कंधार समेत कई प्रांतो में स्कूल खोलने की बात सामने आई थी, लेकिन कुछ घंटो बाद ही इन्हें बंद रखने का आदेश जारी कर दिया था

इसके अलावा तालिबान ने महिलाओं के अकेले फ्लाइट में ट्रेवल करने पर रोक लगाई। उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस जारी न करने के आदेश दिए। साथ ही तालिबान ने कई ऑफिसों में महिलाओं के जाने पर भी रोक लगा दी थी।

तालिबान के खिलाफ महिलाएं सड़क पर

महिलाओं को प्रोटेस्ट करने से रोकने के लिए तालिबान ने कोड़े बरसाए थे। (फाइल)
महिलाओं को प्रोटेस्ट करने से रोकने के लिए तालिबान ने कोड़े बरसाए थे। (फाइल)

इन प्रतिबंधों के बाद अफगानिस्तान की महिलाओं ने सड़क पर उतर कर तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन भी किए। ये प्रदर्शन अधिकतर काबुल और हैरात जैसे बड़े शहरों में ही हुए थे। इन प्रदर्शनों के बाद कई बार महिलाओं के साथ मारपीट की बात भी सामने आई थी।