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भारत का 2500 MT गेहूं काबुल पहुंचा:PAK के ट्रकों से भारत का गेहूं अफगानिस्तान भेजकर क्रेडिट लेना चाहते थे इमरान, मोदी ने नाकाम कर दी चाल

काबुल9 महीने पहले
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पाकिस्तान के लाख रोड़े अटकाने के बावजूद भारत ने भुखमरी से जूझ रहे अफगानिस्तान को 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं भेजा है। भारत में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंदजई ने बताया कि 50 ट्रकों में लदा गेहूं की पहली खेप वाघा-अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान के रास्ते शनिवार को जलालाबाद पहुंची। सभी ट्रकों पर भारत के झंडे लगे थे।

पाकिस्तान ने इस मानवीय सहायता का क्रेडिट लेने के लिए कई हथकंडे अपनाए, लेकिन नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक के आगे उनकी एक न चली। मोदी ने इस अभियान में संयुक्त राष्ट्र (UN) को शामिल कर पाकिस्तान की साजिश पर पानी फेर दिया।

पहले मसला समझिए
अमेरिका और UN की अपील पर 7 अक्टूबर को भारत ने 50 हजार टन गेहूं, दवाईयां और मेडिकल इक्विपमेंट्स भेजने का ऐलान किया था। इसके लिए पाकिस्तान से मदद मांगी, क्योंकि ट्रकों के जरिए अटारी-वाघा बॉर्डर से यह माल पहले पाकिस्तान और फिर अफगानिस्तान भेजा गया। इसमें तीन फायदे हैं। पहला- खर्च कम हो रहा है। दूसरा- जल्दी और आसानी से माल भेजा जा रहा है। तीसरा- अफगान अ‌वाम को बांटने में आसानी होगी।

पाकिस्तान इस गेहूं की खेप पर अपना हाथ साफ करना चाहता था। साथ ही वह अपने देश के झंडे लगे वाहनों से इसे भेजकर खुद क्रेडिट लेने की फिराक में था।
पाकिस्तान इस गेहूं की खेप पर अपना हाथ साफ करना चाहता था। साथ ही वह अपने देश के झंडे लगे वाहनों से इसे भेजकर खुद क्रेडिट लेने की फिराक में था।

अब पाकिस्तान का खेल समझिए
इमरान खान सरकार, ISI और फौज को उम्मीद नहीं थी कि भारत इतने जल्दी अफगानिस्तान की मदद का फैसला लेगा। 7 अक्टूबर को भेजे गए भारतीय विदेश मंत्रालय के लेटर का जवाब पाकिस्तान ने 24 नवंबर को दिया। इसमें फिजूल सी कुछ शर्तें रख दीं। जिसका खुलासा हुआ और इसके साथ ही पाकिस्तान का असली चेहरा भी दुनिया के सामने आ गया। इन्हें समझते हैं।

पाकिस्तान ने रखी थी बेतुकी शर्त
पाकिस्तान की शर्त थी कि भारत के ट्रक वाघा बॉर्डर पर माल उतारें। वहां से इन्हें पाकिस्तान के ट्रकों में लोड किया जाए। फिर ये ट्रक अफगानिस्तान पहुंचें।

क्या था खेल
पाकिस्तान एक तीर से दो शिकार करना चाहता था। पहला- पाकिस्तानी ट्रक जब सहायता सामग्री लेकर जाएंगे तो बीच में इस पर हाथ साफ किया जा सकता है, यानी चोरी किया जा सकता है। इन्हें अपने गोदामों में ट्रांसफर कर सकता है। दूसरा- ट्रकों पर पाकिस्तान का झंडा होगा। मतलब अफगानिस्तान की जनता ये समझे कि उन्हें भूख से बचाने के लिए पाकिस्तान गेहूं और दवाईयां भेज रहा है।

पाकिस्तान अपने ट्रकों के जरिए गेहूं को अफगानिस्तान तक भेजने का प्रस्ताव दे रहा था, लेकिन भारत अपने ट्रकों पर खेप भेजने की बात पर अड़ गया था। उसने UN को इसमें शामिल किया।
पाकिस्तान अपने ट्रकों के जरिए गेहूं को अफगानिस्तान तक भेजने का प्रस्ताव दे रहा था, लेकिन भारत अपने ट्रकों पर खेप भेजने की बात पर अड़ गया था। उसने UN को इसमें शामिल किया।

भारत ने रखी थी UN को शामिल करने की मांग
गत शुक्रवार इटली स्थित भारतीय दूतावास में MOU साइन किया गया था। इसके तहत अफगानिस्‍तान को 50 हजार टन गेहूं पहुंचाया जाना है। इसे पाकिस्‍तान के रास्‍ते जाना है। भारत ने इस सहायता की घोषणा कुछ माह पहले की थी, लेकिन इसमें UN को शामिल करने की बात रखी थी, ताकि बिना किसी बाधा के खेप पहुंचे और बिना किसी भेदभाव के यह सुरक्षित वितरित की जा सके।

UN को शामिल कर भारत ने दिया पाक को जवाब
इस खेप को अफगानिस्तान पहुंचाने का क्रेडिट पहले पाकिस्तान लेना चाहता था। पाकिस्तान अपने ट्रकों के जरिए गेहूं को अफगानिस्तान तक भेजने का प्रस्ताव दे रहा था, लेकिन भारत अपने ट्रकों पर खेप भेजने की बात पर अड़ गया। काफी टालमटोल के बाद सहमति हुई कि अफगानिस्तान के ट्रक अटारी-वाघा सीमा तक पहुंचेंगे। UN को शामिल कर भारत ने एक तरह से पाकिस्‍तान की भूमिका को भी खत्‍म करने का काम किया।

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