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12वीं पास कोलरेर्ड ने कबाड़ से टरबाइन तैयार की:बॉलीवुड फिल्म ‘स्वदेश’ की तर्ज पर अफ्रीकी युवक ने रोशन किया गांव; 150 घरों को बिजली मिल रही

एक महीने पहलेलेखक: लिलोंगवे
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गांव को रोशन करने के बाद कोलरेर्ड अब मिनी ग्रिड लगाना चाहते हैं। - Dainik Bhaskar
गांव को रोशन करने के बाद कोलरेर्ड अब मिनी ग्रिड लगाना चाहते हैं।

साल 2004 में एक फिल्म आई थी। नाम था- स्वदेश। उसमें अभिनेता शाहरुख खान ने एनआरआई मोहन भार्गव का किरदार निभाया था। जब सालों बाद मोहन वतन लौटा तो उसने अपने इनोवेशन से गांव को बिजली से रोशन कर दिया था। रील लाइफ के उस किरदार को अफ्रीकी देश मलावी में एक शख्स ने हकीकत बना दिया। दरअसल, 15 साल पहले 2006 में मलावी में दूरदराज के योबे कोसी गांव में बिजली नहीं थी।

बच्चे मोमबत्ती में पढ़ाई करने को मजबूर थे। तब गांव के 23 वर्षीय कोलरेर्ड कोसी ने बदलाव की शुरुआत की। 40 किमी दूर जिंबा स्कूल से 12वीं पास कर गांव लौटे, तो अंधेरा था। उनका अनुमान था कि घर के पास से गुजरने वाली जल धारा में साइकिल जितना पैडल मारने से बिजली बन सकती है। इसलिए उन्होंने घर में कबाड़ से डायनुमा बनाया, जो काम कर गया। उनका घर बिजली से रोशन होने की खबर गांव में फैली।

कोलरेर्ड ने बताया- ‘मुझसे गांव वाले कहने लगे कि हमारे यहां भी बिजली पहुंचाओ। मैं न तो इंजीनियरिंग पढ़ा था, न ही इलेक्ट्रीशियन के रूप में ट्रेंड। टरबाइन के लिए मैंने पुराने फ्रिज का कंप्रेशर गांव में बह रही नदी में लगाया। ये जुगाड़ भी काम कर गई और छह घर रोशन होने लगे। फिर कबाड़ हो चुकी मशीन से निकालकर एक बड़ी टर्बाइन गांव के बाहर लगा दी है। बांस के खंभों से तार ले जाकर बिजली अब गांव के घरों में पहुंच रही है।

ग्रामीण बोले- अब घर के साथ हमारी जिंदगी भी रोशन हो रही
बिजली गांव वालों को मुफ्त मिलती है। बस उन्हें प्लांट के मेंटेनेंस के रूप में 80 रु. प्रति घर के हिसाब से देने होते हैं। गांव को रोशन करने के बाद कोलरेर्ड अब मिनी ग्रिड लगाना चाहते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि कोलरेर्ड ने गांव ही रोशन नहीं किया, हमारे जीवन में भी उम्मीद का उजाला ला दिया है।

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