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  • After 9 Months, Nepal And India Will Meet Via Video Conferencing, Nepal's Ambassador To India Said Ram And Buddha Do Not Divide Us Together

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रिश्ते सुधारने की कोशिश:9 महीने बाद भारत-नेपाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की, भारत की मदद से हिमालय क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं पर चर्चा हुई

काठमांडू/ नई दिल्ली8 महीने पहले
  • दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए 2016 में मैकेनिज्म तैयार किया गया, इसी के तहत यह 8 वीं बैठक हुई
  • एक दिन पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी थी
  • नेपाल के विदेश मंत्रालय में सचिव शंकर दास बैरागी और नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा बैठक में शामिल हुए

सीमा विवाद और बयानबाजी के बीच भारत और नेपाल 9 महीने बाद आज पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक करेंगे। इसमें भारत की मदद से हिमालय क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने बीच नेशनल हाइवे बनाने, इंटिग्रेटेड भन्सार चौकी (सीमा शुल्क) और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने पर भी बात की। नेपाल की तरफ से विदेश मंत्रालय में सचिव शंकर दास बैरागी शामिल हुए। भारतीय दल की अगुआई नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने की।

एक दिन पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी और उन्हें स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी थी। भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने भी सोमवार को भगवान राम और बुद्ध के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पैदा हुए मनमुटाव को तूल न देने की बात कही थी।

दोनों देशों का भगवान राम और बुद्ध में विश्वास: आचार्य

आचार्य ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत-नेपाल के विदेश मंत्रालय भगवान राम और बुद्ध के बयानों के बारे में स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। हम दोनों भगवान राम और बुद्ध में विश्वास रखते हैं। यह भी मानते हैं कि बुद्ध का जन्मस्थान लुंबिनी है। राम और बुद्ध सर्किट दोनों देशों के आपसी तालमेल से जुड़े प्रोजेक्ट्स हैं। आचार्य ने कहा ये सारी चीजें हमें दूर नहीं करतीं, बल्कि करीब लाती हैं। हमें इन मुद्दों पर किसी तरह का विवाद पैदा करने से बचना चाहिए।

बीते दिनों नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा था कि भगवान राम नेपाल के हैं। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के भगवान बुद्ध को भारत का कहे जाने पर नेपाली विदेश मंत्री ने आपत्ति जताई थी।

दोनों देशों के बीच आठवीं बातचीत

2016 में नेपाल के तब के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड भारत आए थे। दोनों देशों ने आपसी विवाद सुलझाने और सहयोग बढ़ाने के लिए मैकेनिज्म तैयार किया था। 17 अगस्त को इसी मैकेनिज्म के तहत 8वीं बातचीत हुई। हाल के दिनों में सीमा विवाद और दूसरे मुद्दों की वजह से भारत और नेपाल के रिश्तों में खटास दिखी थी। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर भी नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने बयानबाजी की थी।

दोनों देशों के बीच कैसे शुरू हुआ विवाद

भारत ने अपना नया राजनीतिक नक्शा 2 नवंबर 2019 को जारी किया था। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी और कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख इलाके को अपना क्षेत्र बताया था। इस साल 18 मई को नेपाल ने इन तीनों इलाकों को शामिल करते हुए अपना नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे को अपने संसद के दोनों सदनों में पारित कराया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। मई-जून में नेपाल ने भारत से सटी सीमाओं पर सैनिकों की तादाद बढ़ा दी। बिहार में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली सैनिकों ने भारत के लोगों पर फायरिंग भी की थी।

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