पाकिस्तान में जल संकट से हालात खराब:एग्रीकल्चर सेक्टर प्रभावित, बांधों में भी पानी खत्म, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बना खतरा

इस्लामाबाद2 महीने पहले
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पाकिस्तान में पानी की कमी से एग्रीकल्चर सेक्टर और एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज तबाही के मुहाने पर पहुंच गई है। देश के कई क्षेत्रों में सूखे के बावजूद शहबाज शरीफ सरकार इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है। यह समस्या पाकिस्तान के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है।

पाकिस्तान के कंट्री डायरेक्टर आरिफ जब्बार खान ने कहा- जल संसाधनों की सुरक्षा और जल संरक्षण के लिए छोटे बांध बनाकर पानी की कमी से निपटने पर ध्यान नहीं दिया गया। पानी के प्रबंधन के लिए जिम्मेदारियां राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी समस्या रही है।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित
यह संकट पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इसका GDP में 23% हिस्सा है। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा बड़ी समस्या है। देश लगभग 50% पानी की कमी का सामना करना रहा है। 1991 के बाद से अब तक की सबसे ज्यादा कमी का रिकॉर्ड है।

सिंध और पंजाब प्रांत में 75% पानी की कमी
सिंध में पानी की कमी बहुत बड़ी समस्या है। सिंध और पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत पंजाब भी 75% तक पानी की कमी से जूझ रहा है।

पंजाब सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, ताउनसा बैराज से सिर्फ 6 हजार 700 क्यूसेक की आपूर्ति हुई। यह इसकी 25 हजार क्यूसेक की जरूरत से 73% कम है। इसके अलावा थाल नहर 75% कमी का सामना कर रही है, क्योंकि 8 हजार क्यूसेक की जगह 2 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।

बैराज में इतने प्रतिशत तक पानी की कमी
पंजनाद बैराज भी 66% कमी से चल रहा था, इसमें 12 हजार 700 क्यूसेक की जगह 4 हजार 300 क्यूसेक मिल रहा था। सूल बैराज में 24 हजार 200 क्यूसेक की जरूरत के मुकाबले 9 हजार 900 क्यूसेक की आपूर्ति के साथ 59% पानी की कमी थी। वहीं सुलेमानकी बैराज और निचली बहावल नहर दोनों में 54% पानी की कमी, सिधनाई बैराज में 51%, इस्लाम बैराज में 50% और त्रिमू बैराज में 43% पानी की कमी थी। वहीं मेलसी नहर में भी 33% पानी की कमी थी।