अमेरिकी सैनिक अब भी हाई अलर्ट पर:अमेरिकी अधिकारी बोले- फोर्सेस को यूक्रेन नहीं भेजा गया, युद्ध अभी भी टाला जा सकता है

कीव8 महीने पहले
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यूक्रेन और रूस के बीच सीजफायर होने के बाद भी अमेरिका ने अपने सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। इसे लेकर अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन का कहना है कि यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों के निर्माण के जवाब में अभी किसी सैनिक को नहीं भेजा गया है। हमने सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा है। लॉयड ऑस्टिन ने शुक्रवार को रूस से यूक्रेन पर आक्रमण करने के बजाय राजनयिक रास्ता अपनाने का अनुरोध किया।

बॉर्डर डी-एस्केलेट हो सकती है

बुधवार को पेरिस में 8 घंटे तक चली मीटिंग में रूस और यूक्रेन ने सीजफायर पर सहमति व्यक्त की है।
बुधवार को पेरिस में 8 घंटे तक चली मीटिंग में रूस और यूक्रेन ने सीजफायर पर सहमति व्यक्त की है।

अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने काह कि पुतिन बॉर्डर को डी-एस्केलेट करना चुन सकते हैं। वह अपने सैनिकों को दूर हटने का आदेश दे सकते हैं। यूक्रेन में अब भी युद्ध टाला जा सकता है। अगर युद्ध होता है तो बड़ी संख्या में लोग हताहत होंगे। आप सोच सकते हैं यह कितना ज्यादा भयानक होगा।

रूस अगर यूक्रेन पर हमला करता है तो अमेरिका अपने नागरिकों को निकालने के लिए सैनिकों को भेज सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन में फिलहाल 35 हजार अमेरिकी नागरिक है, इनमें से 7 हजार ने राजधानी कीव के अमेरिकी दूतावास में रजिस्ट्रेशन कराया है।

बाइडेन भी दे चुके हैं चेतावनी

जो बाइडेन पुतिन को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यूक्रेन पर हमला हुआ तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।
जो बाइडेन पुतिन को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यूक्रेन पर हमला हुआ तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।

रूसी हमले के खतरे को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन रूस के राष्ट्रपति पुतिन को चेतावनी दे चुके हैं। गुरुवार को उन्होंने कहा था कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो व्लादिमिर पुतिन को व्यक्तिगत तौर पर भी इसकी कीमत चुकानी होगी। व्हाइट हाउस ने पुतिन पर व्यक्तिगत तौर पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी।

बाइडेन के बयान पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कहा- यूक्रेन पर हमले का हमारा कोई इरादा नहीं है। हम किसी भी तरह की जंग का आगाज नहीं करना चाहते। हालांकि, लावरोव ने ये भी साफ कर दिया कि रूसियों को अपने मुल्क की हिफाजत का उतना ही हक है, जितना किसी और देश को।

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