क्या है अमेरिका का 'रो बनाम वेड' मामला:जिसके बाद 5 करोड़ महिलाओं ने अबॉर्शन कराया, जानिए इसकी हर कड़ी और किरदार

वॉशिंगटन3 महीने पहले

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गर्भपात से जुड़े 50 साल पुराने फैसले को पलट दिया है। अदालत ने महिलाओं को 1973 में 'रो बनाम वेड' मामले से मिली गर्भपात की संवैधानिक सुरक्षा खत्म कर दी है। इस फैसले के बाद देश दो धड़े में बंट गया है। जहां एक हिस्सा इसका पुरजोर मुखालिफत कर रहा है, वहीं दूसरा धड़ा इसे ऐतिहासिक बताते हुए इसका स्वागत कर रहा है।

1973 में 'रो बनाम वेड' फैसले के बाद से अमेरिका में लीगल तरीके से लगभग पांच करोड़ अबॉर्शन किए गए थे। वहीं, सिर्फ 2020 में ही हर 5 में से एक अमेरिकी महिला ने अबॉर्शन कराया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर 50 साल पहले का 'रो बनाम वेड' का मामला क्या था।

हम इस मामले और इससे जुड़े सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से बताते हैं...

क्यों कहा गया 'रो बनाम वेड'?
नोर्मा मैककॉर्वी जिन्हें आज दुनिया 'जेन रो' के नाम से जानती है, उन्होंने 1969 में अबॉर्शन को लीगल कराने के लिए लड़ाई लड़ी थी। नोर्मा ने 1969 में राज्य के उस कानून को चुनौती दी, जिसके हिसाब से अबॉर्शन अवैध था। मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और उन्हें जीत मिली।

जेन रो ने जब अबॉर्शन को लीगल कराने करने के लिए याचिका दायर की थी, तब सरकारी वकील हेनरी वेड ने विरोध में जिरह की थी। इस वजह से इस मामले को दुनिया भर में 'रो बनाम वेड' से जाना जाने लगा। इस फैसले ने जेन रो को अमेरिका के घर-घर में फेमस कर दिया था।

15 की उम्र में चचेरे मामा ने किया रेप
नोर्मा मैककॉर्वी का जन्म 22 सितंबर, 1947 को हुआ था। 13 साल की उम्र में माता-पिता के तलाक के बाद इनका जीवन कई परेशानियों से गुजरा। 15 साल की उम्र में ही उनके चचेरे मामा ने उनका तीन हफ्तों तक रेप किया। 16 साल की उम्र में उन्होंने एक तलाकशुदा आदमी से शादी की।

हालांकि, उनका ये फैसला भी किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ। नोर्मा का पति उनके साथ मारपीट करता था। वो अपनी मां के पास लौट गईं। पहले बच्चे के जन्म के बाद उन्हें ड्रग्स की लत लग गई थी, कुछ साल बाद उनके दूसरे बच्चे का जन्म हुआ।

साल 1998 में एपी को दिए एक इंटरव्यू में नोर्मा ने कहा था कि वो सौ फीसदी जीवन की पक्षधर हैं। मैं किसी भी हालत में अबॉर्शन में यकीन नहीं रखती। अगर महिला का रेप भी हो जाता है तो वो बच्चे को मार नहीं सकती। 'रो बनाम वेड' केस में मेरे वकील ने मेरा इस्तेमाल किया।
साल 1998 में एपी को दिए एक इंटरव्यू में नोर्मा ने कहा था कि वो सौ फीसदी जीवन की पक्षधर हैं। मैं किसी भी हालत में अबॉर्शन में यकीन नहीं रखती। अगर महिला का रेप भी हो जाता है तो वो बच्चे को मार नहीं सकती। 'रो बनाम वेड' केस में मेरे वकील ने मेरा इस्तेमाल किया।

गैंगरेप का झूठा दावा कर अबॉर्शन करना चाहा
21 साल की उम्र में जब वो तीसरी बार प्रेगनेंट हुई तो उन्होंने पहले तो गैंगरेप का झूठा दावा कर अबॉर्शन कराना चाहा। लेकिन पुलिस की जांच में गैंगरेप का सबूत नहीं मिलने से वो सफल नहीं हुईं। बाद में उन्होंने कहा कि वो अविवाहित और बेरोजगार हैं इसलिए गर्भपात करना चाहती हैं।

इस दौरान वो वकील लिंडा कॉफी और सारा वेडिंग्टन से मिलीं, जो गर्भपात की मांग करने वाली महिलाओं को तलाश रही थीं। 1973 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके मामले में फैसले देते हुए कहा कि गर्भपात करना है या नहीं ये महिलाओं का अधिकार है। इसके बाद से ही अमेरिका के कई राज्य अबॉर्शन की सुविधा देने के लिए मजबूर हो गए।

भारत में गर्भपात कानून की क्या स्थिति है?
दुष्कर्म पीड़ित, कौटुंबिक व्यभिचार की शिकार या नाबालिग 24 हफ्ते तक गर्भपात की इजाजत है। ऐसी महिलाएं जिनकी वैवाहिक स्थिति गर्भावस्था के दौरान बदल गई हो (विधवा हो गई हो या तलाक हो गया हो) और दिव्यांग महिलाओं को भी 24 हफ्ते तक गर्भपात अधिकार है। अगर भ्रूण में कोई ऐसी विकृति या गंभीर बीमारी हो, महिला की जान का खतरा हो, तो भी 24 हफ्ते में गर्भपात का अधिकार है।