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ड्रैगन से वार्ता की पहल:चीन के एटमी जखीरे से डरा अमेरिका, संधि की पहल; 2030 तक तिगुने होंगे हथियार

2 महीने पहले
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चीन ने हाल में डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है। - Dainik Bhaskar
चीन ने हाल में डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है।

अमेरिका अब चीन के साथ परमाणु अप्रसार संधि करने के लिए बातचीत की तैयारी कर रहा है। पेंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन 2030 तक अपने जखीरे में लगभग 1000 परमाणु हथियार जमा कर लेगा। वर्तमान में चीन के पास लगभग 350 परमाणु हथियार हैं। अमेरिका के डर का सबसे बड़ा कारण चीन के पास बेहतर तकनीक का होना है।

चीन ने हाल में डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है। ये मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से पांच गुना तेजी से किसी भी टारगेट काे मार सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल में हुई वर्चुअल बैठक के बाद अमेरिका ने कूटनीतिक चैनलों से परमाणु अप्रसार की संधि के लिए गंभीरता से प्रयास करने शुरू कर दिए हैं।

बाइडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवान का कहना है कि बाइडेन और जिनपिंग की बैठक के बाद अब इस प्रकार की संधि की पहल के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। लेकिन इसके लिए चीन की ओर से भी सकारात्मक संदेश आना चाहिए। चीन के साथ ऐसी कोई भी संधि होने से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति की स्थापना हो सकेगी। लेकिन इसके लिए अमेरिका को चीन पर भूराजनीतिक दबाव डालने होंगे। बदलते समीकरणों में अमेरिका को रूस से कहीं ज्यादा चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से खतरा है।

सबसे बड़ा खतरा है चीन की एंटी सैटेलाइट तकनीक

  • एंटी सैटेलाइट तकनीक से चीन अमेरिकी सैटेलाइट व अर्ली वार्निंग सिस्टम को पंगु बना सकता है।
  • रूस के समान अमेरिका के पास चीन से साथ कोई न्यूक्लियर हॉटलाइन भी नहीं है।
  • चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के 150 से ज्यादा टेस्ट किए, अमेरिका 9 ही कर पाया है।
  • चीनी हाइपरसोनिक मिसाइल में आड़ी-तिरछी उड़ान की क्षमता।