• Hindi News
  • International
  • America Troubled By Weakness In Mathematics In A Century Could Not Decide Whether Children Learn By Rote Or By Understanding; Expert Said The Problem Will Increase

गणित में कमजोरी से परेशान अमेरिका:एक सदी में यह तय नहीं कर सका कि बच्चे रटकर सीखें या समझकर; विशेषज्ञ बोले- समस्या बढ़ेगी

7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
नेशनल असेसमेंट टेस्ट में स्कोर लगातार घट रहा है। यही नहीं पेशवरों की कमी से कंपनियां जूझ रहीं हैं। - Dainik Bhaskar
नेशनल असेसमेंट टेस्ट में स्कोर लगातार घट रहा है। यही नहीं पेशवरों की कमी से कंपनियां जूझ रहीं हैं।

अमेरिकी बच्चों को गणित के आसान सवाल भी परेशान कर रहे हैं। दशकों से यहां के छात्र गणित की अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी कंपनियां साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित के कौशल वाले लोगों के लिए बेसब्र हैं। परमाणु इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और मशीनिस्ट की भारी कमी है। ऐसे में 30% अमेरिकियों का साधारण गणित के साथ सहज होना चिंता की बात है।

राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा नेशनल असेसमेंट ऑफ एजुकेशनल प्रोग्रेस के नतीजे तो और भी डराने वाले हैं। 13 साल के बच्चों का स्कोर 2012 की तुलना में 5 पॉइंट तक घट गया है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के एलन शॉएनफेल्ड कहते हैं कि अमेरिका की यह समस्या एक सदी से भी पुरानी है। विश्व युद्ध के दौरान उसे इसी के चलते परेशान होना पड़ा था क्योंकि तब हथियारों का हिसाब-किताब रखने के लिए भी मुश्किल से लोग मिल पाते थे। 1890 में इस समस्या से निपटने की ईमानदार कोशिश की गई थी।

इसके बाद 1950 में शीत युद्ध के दौरान बच्चों का कमजोर गणित चिंता का विषय बना, जब तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा स्पुतिनक सैटेलाइट की लॉन्चिंग के बाद वैचारिक समझ पर केंद्रित नया कोर्स लागू किया गया। 1970 में मूल की ओर लौटने का तर्क देकर इसे खारिज कर दिया गया। 1990 के बाद यह राजनीतिक मुद्दा हो गया। रूढ़िवादी पारंपरिक गणित के पक्षधर हैं, जिनमें अल्गोरिदम याद करना और पहाड़े रटना आदि शामिल है। वहीं, प्रगतिवादी वैचारिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं, जिसमें याद करने पर जोर नहीं है।

छात्रों को चुनौतीपूर्ण ओपन एंडेड समस्याएं देकर सुधार सकते हैं कौशल

अमेरिकी थिंक टैंक ‘एजुकेशन पॉलिसी स्टडीज’ के रिक हेज मानते हैं कि टीचर्स सिर्फ बच्चों को अल्गोरिदम याद करवाकर ही समझ लेते हैं कि काम पूरा गया है। यही उनके सीखने में बाधा बनता है। कई सारे शोधों में यह साबित हो चुका है कि सामान्य प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल से गणित की समस्याएं हल करना नहीं सिखा सकते।

पारंपरिक समस्याएं जैसे- दो ट्रेनें अलग-अलग स्पीड से एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं, वो कब मिलेंगी। ये अप्रामाणिक हैं और छात्रों के जीवन के लिए प्रासंगिक भी नहीं है। हेज के मुताबिक छात्रों को चुनौतीपूर्ण ओपन एंडेड समस्याएं दी जानी चाहिए, जैसे- स्कूल के एक अभियान में 10 लाख किताबें जमा हुईं, इन्हें पैक करने के लिए कितने बॉक्स लगेंगे।