कोरोना से मुसीबत:अमेरिका: भारतीय दवाओं के लिए परेशान, वीजा एक्सटेंशन को लेकर भी बढ़ रही दिक्कतें

न्यूयॉर्क2 वर्ष पहले
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जानकारी के मुताबिक, जो लोगछुट्टियां बिताने के हिसाब से अमेरिका गए थे, वे कोरोना महामारी के चलते वही फंस गए हैं। -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
जानकारी के मुताबिक, जो लोगछुट्टियां बिताने के हिसाब से अमेरिका गए थे, वे कोरोना महामारी के चलते वही फंस गए हैं। -फाइल फोटो
  • जयपुर फूट यूएसए के चेयरमैन प्रेम भंडारी के मुताबिक, अमेरिका में बंदूक तो बिना लाइसेंस मिल सकती है मगर दवा खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी है
  • प्रेम भंडारी ने बताया कि लोगों को बुजुर्गों की दवाओं के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहां दवाएं बहुत महंगी होती हैं

कोरोनावायरस ने दुनियाभर में कोहराम मचा रखा है। शायद ही कोई देश है जो इस महामारी से अछूता बचा है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली जैसे देशों को भी इस वायरस से जूझना पड़ रहा है। इस बीच, लाखों भारतीय हैं जो विदेशों में फंसे हुए हैं। हालांकि, सोमवार को भारत सरकार ने 7 मई से विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने की घोषणा की है। अभी भी ऐसे लाखों भारतीय हैं, जिन्हें स्वदेस लौटने का इंतजार है। कारण कि विदेश में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जयपुर फुट यूएसए के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि भारत से जो लोग यहां छुट्टियां बिताने या अपनों से मिलने के हिसाब से आए थे, वे कोरोना महामारी के चलते यही फंस गए हैं। ऐसे में उन्हें दवाएं और वीजा एक्सटेंशन जैसी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

'विदेश सचिव को पत्र लिखकर दिक्कतों से अवगत कराया'

भंडारी ने बताया कि कुछ हफ्ते पहले मैंने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, गृह मंत्रालय के सचिव अजय भल्ला और सिविल एविएशन के सचिव प्रदीप सिंह खरौला को पत्र लिखा था। पत्र के माध्यम से मैंने उन्हें बताया था कि मनीला में फंसे भारतीय छात्रों को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका में बुजुर्गों को दवाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। 

'वेलफेयर फंड से छात्रों की मदद हो'

भंडारी ने कहा, ''कोरोना के चलते कोई बाहर नहीं निकल पा रहा है और यहां डॉक्टर बिना देखे दवा नहीं लिखता। ऐसे में बाहर के लोगों को दवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। अमेरिका में 2 लाख से ज्यादा छात्र फंसे हैं। ज्यादातर की नौकरी जा चुकी है। पैसे खत्म हो चुके हैं। वहीं, मनीला में छात्रों खाने को लेकर भी परेशान होना पड़ रहा है। हमने मांग की है कि इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड से इन छात्रों की मदद हो।'''

स्वदेस लौटने के लिए भारतीय रजिस्ट्रेशन करवाएं'

भंडारी ने बताया कि वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के प्रयासों से भारतीय होटल व्यवसायियों ने भारतीय छात्रों के लिए 6 हजार कमरों की व्यवस्था की है। मगर 2 लाख बड़ी संख्या है। ऐसे में दिक्कत हो रही है। यह अच्छा है कि मोदी सरकार ने अब भारतीयों को स्वदेस लाने का फैसला लिया है। लोगों में एक उम्मीद बंधी है। दूतावास ने भारतीयों से कहा है कि फॉर्म भरकर रजिस्ट्रेशन करवाएं ताकि लौट सकें।

'भारतीय दूतावास ने संपर्क किया मगर बात नहीं बन पाई'

भंडारी के मुताबिक, एक भारतीय लड़की मनीला में फंसी हुई है। उसके पिता अमेरिका में हैं और मां जयपुर में हैं। दिक्कत यह है कि लड़की को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा है। उसके पिता ने हमसे मदद मांगी है। हमने इस संदर्भ में मनीला स्थित भारतीय दूतावास को बताया है। उन्होंने संपर्क तो किया है मगर अभी तक बात नहीं पाई है।

'वीजा एक्सटेंशन भी एक तरह की चुनौती'

भंडारी ने बताया कि मैंने सेक्रेट्री ऑफ स्टेट माइक पोम्पियो को पत्र लिखकर वीजा एक्सटेंशन की फीस माफ करने की अपील की है। कारण कि यहां जो भारतीय फंस गए हैं। उनके सामने दो तरह की समस्याएं हैं। पहली फ्लाइट कब शुरू होंगी, पता नहीं। दूसरा वीजा एक्सटेंशन के लिए लगने वाली 455 डॉलर की फीस जो भारतीय रुपयों में करीब 34 हजार होती है। लोगों को पैसों की कमी से भी जूझना पड़ रहा है।

भंडारी ने बताया कि मैंने यह बात भारतीय विदेश सचिव श्रृंगला की जानकारी में लाई है।

 हालांकि, न्यूयॉर्क स्थित इंडियन काउंसलेट लगातार यहां जरुरतमंद लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहा है। वकीलों और डॉक्टरों के साथ मिलकर वेबिनार भी कर रहा है। इससे यहां परेशान हो रहे लोगों की बहुत ज्यादा मदद हो जाती है।