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टाइपिंग करने की जरूरत नहीं:जो सोचेंगे वो बिना बोले और टाइप किए हो जाएगा सेंड, इस नई खोज से शॉपिंग भी होगी

न्यूयॉर्क6 महीने पहले
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62 साल के ऑस्ट्रेलियाई फिलिप ओ’कीफ सिर्फ सोचकर सोशल मीडिया पर मैसेज भेजने वाले दुनिया के पहले शख्स बन गए हैं। उन्होंने अपने दिमाग में आए विचार को ट्वीट में बदल दिया। संदेश में उन्होंने लिखा कि अब की-बोर्ड पर टाइपिंग या कुछ कहना जरूरी नहीं, यह मैसेज मैंने सिर्फ सोचकर बनाया है।’ ओ’कीफ के मस्तिष्क में लगाए गए पेपर क्लिप जितने छोटे से इम्प्लांट से यह संभव हो पाया है।

लकवाग्रस्त मरीजों को मदद मिलेगी
फिलिप के शरीर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त है। वे पिछले 7 साल से एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) से पीड़ित हैं, इसके चलते वे ऊपरी अंगों को हिलाने-डुलाने में असमर्थ हैं। यह मोटर न्यूरॉन डिसीज का ही एक प्रकार है। कैलिफोर्निया स्थित न्यूरोवस्कुलर और बायोइलेक्ट्रॉनिक्स मेडिसिन कंपनी सिंक्रॉन द्वारा बनाए गए ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस ‘स्टेंट्रोड’ से ओ’कीफ जैसे लाखों लोगों की जिंदगी बदल जाएगी।

यह टेक्नोलॉजी सिर्फ सोच के जरिए कंप्यूटर पर काम करने की सहूलियत देती है। ओ’कीफ बताते हैं,‘जब इस टेक्नोलॉजी के बारे में सुना था, तब उम्मीद थी कि ये कुछ हद तक मददगार होगी। पर इसने मुझे पूरी तरह से आजादी दे दी है। यह सिस्टम हैरानी भरा यानी बाइक चलाना सीखने जैसा है। इसके लिए प्रैक्टिस की जरूरत पड़ती है। एक बार जब आप अभ्यस्त हो जाते हैं, तो यह आसान हो जाता है।

बैंकिंग, खरीदारी और ई-मेल भेजने में आसानी होगी
अब मैं सिर्फ सोचता हूं कि कहां क्लिक करना है, बस इसके बाद बैंकिंग, खरीदारी, ई-मेल भेजना आसानी से हो जाता है। फिलिप ने मैसेज भेजने के लिए सिंक्रॉन के सीईओ थॉमस ऑक्सली का ट्विटर हैंडल इस्तेमाल किया था। बकौल ऑक्सली,‘फिलिप के ये रोचक संदेश इम्प्लांटेबल ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के लिए महत्वपूर्ण माइलस्टोन हैं। इससे फिलिप जैसे कई लोगों को गंभीर लकवाग्रस्त होने के बावजूद आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।’

ऑक्सली ने बताया कि स्टेंट्रोड का इस्तेमाल करने वाले मरीजों की क्लिक करने की सटीकता 93% है। वे हर मिनट 14 से 20 अक्षर टाइप कर सकते हैं। खास बात यह है कि यह इम्प्लांट गले की नस के जरिए होता है, इसलिए मस्तिष्क में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।

स्टेंट्रोड को गर्दन पर ब्लड वैसल के जरिए प्रत्यारोपित किया जाता है। ये वैसल्स गतिविधियों को रिकॉर्ड करने वाले सेंसर्स से युक्त होती हैं। मस्तिष्क से मिले सिग्नल टेलीमेट्री के जरिए सीने पर लगे ट्रांसमीटर पर पहुंचते हैं। प्रोसेसिंग के बाद सिग्नल कंप्यूटर के कमांड में बदल जाते हैं। आई ट्रैकर कर्सर को नेविगेट करने में मदद करता है।

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