• Hindi News
  • International
  • American Virologist । Jesse Bloom Discoveres Early Sequencing । Data Of Covid 19 Were Missing । Sequence Read Archive

चीन और कोरोना के कनेक्शन पर एक और खुलासा:अमेरिकी वायरोलॉजिस्ट की रिसर्च में दावा- चीन ने कोरोना से जुड़ा डेटा आर्काइव से हटाया, ऑनलाइन से ऑफलाइन किया

वुहान5 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

कोरोना वायरस जानवर से आया या चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से यह लीक हुआ। इस पर पिछले कुछ महीनों में ढेर सारी रिसर्च रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं। ज्यादातर रिपोर्ट्स में कोरोना वायरस पर दिए गए चीन के डेटा पर सवाल उठाया गया है। शनिवार को एक नई रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें चीन में वायरस से जुड़े शुरुआती डेटा पर सवाल खड़े किए गए हैं।

ANI के मुताबिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वुहान में शुरुआती तौर पर सामने आए कोरोना मरीजों का डेटा गायब कर दिया गया है। पहले इस डेटा को ऑनलाइन एक्सेस किया जा सकता था, लेकिन अब इसे पूरी तरह से हटा दिया गया है। ये खुलासा अमेरिका के सिएटल के फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर में वायरोलॉजिस्ट जेसी ब्लूम ने अपनी रिपोर्ट में किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वुहान के डेटा सीक्वेंस के आर्काइव से बहुत सा डेटा गायब किया गया है। यदि ये डेटा वैज्ञानिकों को मिल जाए तो कोरोना के ओरिजन का पता आसानी से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट में चीनी रिसर्चर्स पर भी डेटा डिलीट करने का शक जाहिर किया गया है। अमेरिकी अखबार वॉशिंटन पोस्ट ने इस रिसर्च पर एक रिपोर्ट पब्लिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन कुछ छिपा रहा है और ये उसके खिलाफ एक नई जांच शुरू करने का सही समय है।

आम आदमी की पहुंच से दूर किया डेटा
डॉ. ब्लूम ने दावा किया है वायरस जानवर से इंसानों में फैला या वुहान के वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट में दुर्घटना हुई, इसका पता लगाने के लिए शुरुआती मरीजों का डेटा सामने आना जरूरी है। रिसर्च में कहा गया है कि चीनी वैज्ञानिकों ने डेटा पूरी तरह से खत्म नहीं किया है, इसे बस उन जगहों से हटा दिया गया है, जहां आम आदमी आसानी से पहुंच सकता था। रिसर्च के मुताबिक चीन इस बात का खास ख्याल रख रहा है कि कोई भी बाहरी व्यक्ति या वैज्ञानिक कोरोना के शुरुआती मरीजों के डेटा तक न पहुंच सके।

डॉक्टरों की एंट्री बैन की
वॉशिंटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक वुहान की लैब में जहां डेटा रखा जाता था, वहां डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की एंट्री पूरी तरह से बैन कर दी गई है। चीन पहले भी इस बात से इंकार करता आया है कि वुहान लैब में हुई किसी दुर्घटना के कारण कोरोना वायरस लीक हुआ है।

कोरोनावायरस पर 2015 से रिसर्च कर रहा है चीन: ऑस्ट्रेलियाई मीडिया
कोरोना वायरस 2020 में अचानक नहीं आया, बल्कि चीन इसकी तैयारी चीन 2015 से कर रहा था। चीन की सेना 6 साल पहले से कोविड-19 वायरस को जैविक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की साजिश रच रही थी। ‘द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन’ ने अपनी रिपोर्ट में ये खुलासा किया था। रिपोर्ट में चीन के एक रिसर्च पेपर को आधार बनाया गया था। इसमें कहा गया था कि चीन 6 साल पहले से सार्स वायरस की मदद से जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक चीनी वैज्ञानिक और हेल्थ ऑफिसर्स 2015 में ही कोरोना के अलग-अलग स्ट्रेन पर चर्चा कर रहे थे। उस समय चीनी वैज्ञानिकों ने कहा था कि तीसरे विश्वयुद्ध में इसे जैविक हथियार की तरह उपयोग किया जाएगा। इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि इसमें हेरफेर करके इसे महामारी के तौर पर कैसे बदला जा सकता है।

चीन के वुहान की लैब क्यों चर्चा में है?
चीन के वुहान शहर की वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एक हाई सिक्योरिटी रिसर्च लैब है। यहां प्रकृति में पाए जाने वाले उन रोग जनकों (ऐसे बैक्टीरिया या वायरस जो इंसानों में रोग फैला सकते हैं) की स्टडी की जाती है जो इंसानों को घातक और नई बीमारियों से संक्रमित कर सकते हैं। 2002 में चीन में मिले SARS-CoV-1 वायरस ने दुनियाभर में 774 लोगों की जान ली थी। उसके बाद से इस लैब में चमगादड़ से इंसानों में फैलने वाले वायरस को लेकर कई स्टडी हुई हैं। इसी लैब में हुई स्टडी में दक्षिण-पश्चिम चीन स्थित चमगादड़ की गुफाओं में SARS जैसे वायरस मिले थे।

इस इंस्टीट्यूट में एक्सपेरिमेंट के लिए भी जंगली जानवरों से जेनेटिक मटेरियल इकट्ठा किए जाते हैं। यहां काम करने वाले इंसानों पर वायरस के असर का पता लगाने के लिए जानवरों में लाइव वायरस के साथ प्रयोग भी करते हैं। यहां काम करने वाले वैज्ञानिकों को कठोर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को फॉलो करना होता है जिससे गलती से भी वायरस के कारण कोई अनहोनी न हो। हालांकि, इसके बाद भी इसके खतरों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

खबरें और भी हैं...